Jharkhand News: झारखंड में लंबे समय से जारी माओवादी गतिविधियां अब अपने आखिरी दौर में पहुंचती नजर आ रही हैं. सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि राज्य में सक्रिय बड़े नक्सली संगठन लगातार कमजोर पड़ रहे हैं और अब हालात ऐसे बन चुके हैं कि कुख्यात माओवादी नेता मिसिर बेसरा भी मुख्यधारा में लौट सकता है. सूत्रों के मुताबिक मिसिर बेसरा सुरक्षा बलों के संपर्क में है और जल्द ही हथियार छोड़कर सरेंडर कर सकता है. उसके साथ कई अन्य इनामी नक्सलियों के भी आत्मसमर्पण की संभावना जताई जा रही है. फिलहाल सुरक्षा बल पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
चार साल से सारंडा जंगल में चल रहा था बड़ा अभियान
दरअसल पिछले चार वर्षों से सारंडा के घने जंगलों में सुरक्षा बलों की टीमें कुख्यात माओवादी नेता मिसिर बेसरा और उसके दस्ते की तलाश में लगातार अभियान चला रही थीं. केंद्र सरकार की ओर से नक्सलवाद खत्म करने की तय समय सीमा के बाद यह अभियान और तेज कर दिया गया. सुरक्षा एजेंसियों ने खास तौर पर बड़े माओवादी नेताओं को टारगेट किया. पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमिटी स्तर के नेताओं की तलाश में कई बड़े ऑपरेशन चलाए गए. इसी अभियान के दौरान 22 जनवरी 2026 को सेंट्रल कमिटी सदस्य अनल दा उर्फ तूफान जी को मार गिराया गया था. इसे सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी माना गया.
अब भी जंगल में मौजूद हैं दो बड़े माओवादी नेता
तूफान जी के मारे जाने के बाद भी सारंडा इलाके में दो बड़े माओवादी नेताओं की मौजूदगी की बात सामने आती रही. इनमें पहला नाम पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा का है जबकि दूसरा सेंट्रल कमिटी सदस्य असीम मंडल है. झारखंड पुलिस ने दोनों पर एक एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा है. बताया जा रहा है कि इनके साथ अभी भी 35 से 40 की संख्या में कैडर मौजूद हैं. इनमें कई ऐसे नक्सली भी शामिल हैं जिन पर एक लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक का इनाम है. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इनके पास आधुनिक हथियार हैं और जंगल के इलाकों में इनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है.
सुरक्षा बलों ने जंगल में बढ़ाई घेराबंदी
पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के खिलाफ रणनीति पूरी तरह बदल दी. जंगल के रास्तों पर कड़ी निगरानी शुरू की गई जिससे नक्सलियों तक खाने पीने का सामान और गोला बारूद पहुंचना लगभग बंद हो गया.
दूसरी तरफ जंगल के भीतर लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए गए. सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से माओवादी नेटवर्क पर लगातार दबाव बढ़ता गया. जंगलों में लगातार अभियान और ताबड़तोड़ कार्रवाई के कारण नक्सलियों की गतिविधियां सीमित होती चली गईं.
सुरक्षा एजेंसियों का दावा, अब एक सीमित इलाके में सिमटे नक्सली
सुरक्षा बलों का कहना है कि अब माओवादी एक सीमित इलाके तक सिमट चुके हैं और उनका नेटवर्क लगभग टूट चुका है. अधिकारियों का दावा है कि हालात ऐसे हैं कि कभी भी माओवादी संगठन पूरी तरह खत्म हो सकता है.
इसी बीच खबर सामने आई कि मिसिर बेसरा के दस्ते के 15 साथियों ने पहले ही सरेंडर कर दिया है. इससे संगठन और कमजोर पड़ा. माना जा रहा है कि लगातार बढ़ते दबाव और संसाधनों की कमी के कारण अब बड़े नक्सली नेता भी आत्मसमर्पण की राह पर हैं.
माओवादियों के भीतर भी बदल रही सोच
सूत्रों के मुताबिक नक्सली संगठनों के भीतर भी अब यह चर्चा शुरू हो चुकी है कि लड़ाई जारी रखने का समय खत्म हो गया है. लगातार मुठभेड़ों, गिरफ्तारियों और साथियों के सरेंडर के बाद संगठन के भीतर मनोबल कमजोर पड़ा है.
इसी वजह से यह संभावना जताई जा रही है कि मिसिर बेसरा भी जल्द हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट सकता है. हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अभी आधिकारिक तौर पर इस पर खुलकर कुछ नहीं कह रही हैं, लेकिन अंदरूनी स्तर पर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक दौर
झारखंड लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित राज्यों में शामिल रहा है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में लगातार चलाए गए अभियानों, आधुनिक तकनीक और संयुक्त ऑपरेशन के कारण माओवादी नेटवर्क काफी कमजोर हुआ है. अब अगर मिसिर बेसरा जैसे बड़े नेता भी सरेंडर करते हैं, तो इसे झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ी सफलता के तौर पर देखा जाएगा. साथ ही यह उन इलाकों के लिए भी राहत की खबर होगी जहां वर्षों से लोग हिंसा और डर के माहौल में जी रहे थे.