मंगलवार सुबह आरोपी का बड़ा बेटा अभिषेक रायपुर से जमशेदपुर पहुंचा। पुलिस हिरासत में पिता और पुत्र का आमना-सामना हुआ तो रवींद्र खुद को संभाल नहीं पाया और फूट-फूटकर रोने लगा। उसने बेटे से बार-बार अपनी गलती के लिए माफी मांगते हुए वहां से चले जाने को कहा। यह मार्मिक दृश्य देखकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी भावुक हो गए।
पूछताछ में रवींद्र ने बताया कि वह पिछले कुछ समय से गहरे अवसाद और मानसिक दबाव में जी रहा था। रिटायरमेंट के बाद परिवार का भविष्य, घर निर्माण, बच्चों की शादी और आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर वह लगातार चिंतित रहता था। सोमवार सुबह करीब पांच बजे नींद खुलने के बाद उसके मन में यह डर और गहरा हो गया कि यदि बीमारी के कारण उसकी मौत हो गई तो परिवार बेसहारा हो जाएगा। इसी नकारात्मक सोच और भय के कारण उसने पूरे परिवार को खत्म करने जैसा खौफनाक फैसला ले लिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने सबसे पहले किचन में खाना बना रही पत्नी सरिता की हत्या की। इसके बाद कमरे में सो रहे बेटे रविषेक और बेटी सुप्रिया को भी मौत के घाट उतार दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद जब उसने पत्नी का शव देखा तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने खुद भी आत्महत्या की कोशिश की, लेकिन वह बच गया।
मंगलवार को पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराया। घटना के बाद पूरे शहर में शोक और दहशत का माहौल है। पुलिस आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी कर रही है। यह दर्दनाक घटना मानसिक तनाव और नकारात्मक सोच के खतरनाक परिणाम की भयावह मिसाल बनकर सामने आई है।