Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची ने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। शहर की सरकारी संपत्तियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सफलतापूर्वक दर्ज करने के लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने रांची नगर निगम की सराहना करते हुए 5 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की है। यह पुरस्कार निगम द्वारा अपनी संपत्तियों के पारदर्शी प्रबंधन और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के लिए दिया गया है।
जीआईएस मैपिंग से मिली नई पहचान, अब एक क्लिक पर मिलेगी जानकारी
नगर निगम ने झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (JSAC) के साथ मिलकर शहर के हर कोने की संपत्तियों की जीआईएस (GIS) मैपिंग पूरी की है। इसके तहत सरकारी जमीन, बस टर्मिनल, हाट-बाजार, सामुदायिक भवन और कार्यालयों को डिजिटल मैप पर चिन्हित किया गया है।
- राजस्व में बढ़ोतरी: इस तकनीक से निगम को न केवल अपनी जमीनों के सटीक रकबे की जानकारी मिली है, बल्कि अतिक्रमण रोकने और राजस्व बढ़ाने में भी बड़ी मदद मिली है।
- ऑनलाइन सुविधाएं: अब लोगों के लिए सामुदायिक भवनों की बुकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है।
ड्रोन सर्वे से खुलेगा "टैक्स चोरी" का राज, 2.5 लाख घरों की होगी स्कैनिंग
प्रोत्साहन राशि मिलने के बाद अब नगर निगम और भी हाईटेक होने जा रहा है। निगम जल्द ही शहर के लगभग ढाई लाख घरों का ड्रोन सर्वे शुरू करने वाला है। इस सर्वे के जरिए:
- हर इमारत का अलग डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा।
- मकान की मंजिलों की संख्या और उसके क्षेत्रफल का सटीक माप लिया जाएगा।
- यह पता लगाया जाएगा कि भवन का उपयोग आवासीय हो रहा है या व्यावसायिक।
- निगम का मानना है कि इस सर्वे के बाद होल्डिंग टैक्स चोरी पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी और ईमानदार टैक्स दाताओं को पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
भविष्य की स्मार्ट सिटी की ओर बढ़ते कदम
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, केंद्र से मिले इन 5 करोड़ रुपयों का उपयोग शहर की परिसंपत्तियों की रियल-टाइम निगरानी और प्रशासन को मजबूत करने में किया जाएगा। यह डिजिटल डेटा भविष्य में रांची को "स्मार्ट सिटी" की श्रेणी में शीर्ष पर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा। शहर के विकास और बेहतर नागरिक सुविधाओं के लिए यह डेटाबेस आने वाले समय में बेहद उपयोगी होगा।