Jharkhand News: झारखंड सचिवालय में कई दिनों से चल रहा गतिरोध भले ही फिलहाल थम गया हो, लेकिन मामला अब नए विवाद में बदलता दिख रहा है. कार्मिक विभाग की ओर से रिव्यू सिस्टम को लेकर जारी अधिसूचना के बाद झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने खुलकर नाराजगी जताई है. संघ ने इस मुद्दे पर विभाग के सचिव और मंत्री को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं.
मंत्री से वार्ता के बाद सहमति पर स्पष्टता नहीं, समिति की भूमिका पर उठे सवाल
संघ द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उससे जुड़ा कोई आधिकारिक दस्तावेज या कार्यवाही अब तक जारी नहीं की गई है. न ही इस संबंध में किसी प्रकार की अभिलेखीय जानकारी संघ को दी गई है. पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बातचीत के दौरान यह तय हुआ था कि समीक्षा समिति के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में केंद्रीय सचिवालय और झारखंड सचिवालय में पदों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा को शामिल किया जाएगा. साथ ही यह भी सहमति बनी थी कि समिति का प्रतिवेदन केवल परामर्शात्मक होगा और रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मंत्री संघ के प्रतिनिधियों के साथ पुन, समीक्षा करेंगे. इसके बाद अंतिम निष्कर्ष मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा. संघ का कहना है कि इन सहमतियों का पालन नहीं हुआ है.
समिति में नाम शामिल, पर आदेश की प्रति नहीं, मुख्यमंत्री की मंजूरी पर भी सवाल
संघ ने पत्र में यह भी कहा है कि विभागीय आदेश के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि सेवा संघ के दो पदाधिकारियों को समिति में शामिल किया गया है. हालांकि इस संबंध में मूल आदेश की प्रति और विभागीय अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. संघ के अनुसार दस्तावेजों के अभाव में समिति के सदस्यों को अपना पक्ष रखने में कठिनाई होगी. इसके अलावा संघ ने यह भी आशंका जताई है कि जारी संशोधन आदेश पर मुख्यमंत्री की मंजूरी नहीं ली गई है. जबकि समिति के गठन से जुड़े मूल आदेश में मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद ही निर्णय लिया गया था. ऐसे में संघ का कहना है कि नियमों के अनुसार इस संशोधन आदेश पर भी मुख्यमंत्री की मंजूरी आवश्यक है.