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  • 2026-04-27

Seraikela News: 41 डिग्री की भीषण गर्मी में SP ऑफिस के बाहर इंतजार से नाराज पत्रकार, एक घंटे बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस का किया बहिष्कार

Seraikela: सरायकेला में मीडिया और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी का एक गंभीर मामला सामने आया, जहां 41 डिग्री से अधिक तापमान के बीच पत्रकारों को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी द्वारा बुलाई गई थी, जिसके लिए पत्रकार तय समय पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें खुले में खड़ा रहना पड़ा। वहां न तो बैठने की कोई व्यवस्था थी और न ही पेयजल की सुविधा, जिससे भीषण गर्मी में स्थिति और अधिक कठिन हो गई। तेज धूप और लू के बीच लंबे समय तक खड़े रहना पत्रकारों के स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम भरा साबित हो सकता था।

अधिकारी नहीं पहुंचे, मीडिया ने किया सामूहिक बहिष्कार
करीब एक घंटे तक इंतजार के बावजूद जब कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो पत्रकारों में नाराजगी बढ़ गई। जिसके बाद सभी मीडिया कर्मियों ने एकजुट होकर प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार कर दिया। पत्रकारों का कहना है कि इस तरह की देरी से न केवल उनका समय प्रभावित होता है, बल्कि खबरों के संकलन और प्रकाशन की प्रक्रिया भी बाधित होती है, क्योंकि पत्रकारिता में समय का विशेष महत्व होता है।

लापरवाही पर उठे सवाल, स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप
भीषण गर्मी में इस तरह इंतजार कराना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। 41 डिग्री तापमान में लू और डिहाइड्रेशन का खतरा बना रहता है, ऐसे में पत्रकारों को बिना किसी व्यवस्था के खड़ा रखना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है। इस घटना ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह भी उजागर किया है कि बुनियादी व्यवस्थाओं की अनदेखी किस तरह परेशानी का कारण बन सकती है।

भविष्य के लिए जरूरी सुधार और बेहतर समन्वय
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह आवश्यक हो गया है कि प्रशासन मीडिया के साथ अपने व्यवहार और समन्वय में सुधार करे। प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसे कार्यक्रमों में समय का पालन, बैठने और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही, देरी होने की स्थिति में पहले से सूचना देना या वैकल्पिक व्यवस्था करना जरूरी है, ताकि इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।

पत्रकारों के समय और सम्मान का रखना होगा ध्यान
यह घटना इस बात का संकेत है कि पत्रकारों के समय और सम्मान को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और उनके साथ इस तरह का व्यवहार न केवल असुविधाजनक है, बल्कि व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। प्रशासन को यह समझना होगा कि पारदर्शिता और संवाद के साथ-साथ सम्मानजनक व्यवहार भी उतना ही जरूरी है।
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