Ranchi Crime News: रांची के ऐतिहासिक और आस्था के प्रमुख केंद्र जगन्नाथपुर मंदिर में हुई सुरक्षा गार्ड की नृशंस हत्या के मामले को पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझा लिया है. एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने मंदिर के पास की ही बस्ती से तीन युवकों, देव कुमार, विकास महली और आयुष कुमार को गिरफ्तार किया है. अपराधियों ने न केवल हत्या की बात कबूली है, बल्कि उनके पास से लूटी गई नकदी और वारदात में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिए गए हैं.
चोरी से शुरू हुआ विवाद हत्या पर हुआ खत्म
पूछताछ में जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला है. पकड़े गए तीनों आरोपी मंदिर के पास की ही बस्ती के रहने वाले हैं और वे मंदिर की दान पेटी से पैसे चुराने की नीयत से दाखिल हुए थे. इसी दौरान वहां तैनात गार्ड बिरसा मुंडा ने उन्हें पहचान लिया. अपनी पहचान उजागर होने और पकड़े जाने के डर से इन युवकों ने बेरहमी से बिरसा मुंडा की हत्या कर दी. घटना के बाद वे दान पेटी से पैसे लेकर फरार हो गए और उन पैसों से नए कपड़े भी खरीदे, जो उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है.
सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों ने दी कामयाबी
यह वारदात 24 अप्रैल की रात की है, जिसने पूरी राजधानी को झकझोर कर रख दिया था. अपराधी मंदिर की पवित्रता और एक निर्दोष की जान की परवाह किए बिना लूटपाट कर भाग निकले थे. धुर्वा थाना में मामला दर्ज होते ही सिटी एसपी पारस राणा के नेतृत्व में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला. स्थानीय इनपुट और वैज्ञानिक जांच के मेल ने पुलिस को सीधे आरोपियों की दहलीज तक पहुंचा दिया.
सुरक्षित नहीं हैं हमारे धरोहर और रक्षक
एक ऐतिहासिक मंदिर परिसर में एक सुरक्षा गार्ड की हत्या सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. नशे की लत या त्वरित धन की लालसा में युवा किस कदर अपराध की दलदल में फंस रहे हैं, यह घटना उसका जीता-जागता उदाहरण है. पुलिस की त्वरित कार्रवाई प्रशंसनीय है, लेकिन यह घटना हमें चेताती है कि सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा केवल एक गार्ड के भरोसे छोड़ना पर्याप्त नहीं है. समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के घेरे को और मजबूत करना होगा