Nepal Breaking: प्रधानमंत्री बालेन शाह की कैबिनेट में गृहमंत्री बने सुदन गुरुंग का इस्तीफा नेपाल की सत्ता में मचे घमासान का सबसे बड़ा संकेत है. पद संभालने के मात्र 21 दिनों के भीतर ही गुरुंग पर आय से अधिक संपत्ति, मनी लॉन्ड्रिंग और विवादित कंपनियों के “स्वीट शेयर” (मुफ्त या कम दाम पर मिले शेयर) खरीदने के गंभीर आरोप लगे हैं. हालांकि, पदभार संभालते ही उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कर सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन अब वे खुद जांच के घेरे में हैं. इस्तीफे के बाद गुरुंग ने नैतिकता की दुहाई देते हुए कहा कि वे “कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट” से बचने के लिए पद छोड़ रहे हैं, साथ ही उन्होंने मीडियाकर्मियों पर भी “स्वीट शेयर” के खेल में शामिल होने का तीखा तंज कसा.
भारत से आने वाले सामान पर ड्यूटी और “रोटी-बेटी” का संकट
बालेन शाह सरकार के लिए मुश्किलें सिर्फ भीतर से नहीं, बल्कि सड़कों से भी आ रही हैं. नेपाल के काठमांडू समेत कई प्रमुख शहरों में जनता भारी विरोध प्रदर्शन कर रही है. इस जनाक्रोश की मुख्य वजह भारत से आने वाले सामानों पर बढ़ी हुई कस्टम ड्यूटी है. सरकार ने 100 रुपये से अधिक की वस्तुओं पर शुल्क लगाकर दैनिक उपभोग की चीजों को महंगा कर दिया है. इससे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों की कमर टूट गई है. लोग इसे सदियों पुराने “रोटी-बेटी” के रिश्तों पर चोट मान रहे हैं, जिससे सरकार की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है.
“Gen-Z” आंदोलन और सुशासन की मांग
नेपाल में युवाओं का “Gen-Z” आंदोलन भ्रष्टाचार और पुरानी राजनीतिक कार्यशैली के खिलाफ एक बड़ी शक्ति बनकर उभरा है. पूर्व गृहमंत्री गुरुंग ने भी अपने संदेश में स्वीकार किया कि वर्तमान नेतृत्व को जनता के प्रति उत्तरदायी होना ही होगा. बालेन शाह सरकार, जो खुद क्रांतिकारी बदलाव के वादे के साथ सत्ता में आई थी, अब अपने ही आदर्शों के बोझ तले दबी नजर आ रही है. 46 बलिदानियों की विरासत का हवाला देने के बावजूद, सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों और महंगाई के मोर्चे पर विफल साबित होती दिख रही है.
संकट में बालेन सरकार: क्या टिक पाएगी सत्ता?
महज एक महीने के भीतर गृहमंत्री का जाना और सड़कों पर बढ़ता तनाव बालेन शाह के लिए “अग्निपरीक्षा” जैसा है. गृहमंत्री के इस्तीफे के बाद अब यह बड़ा सवाल है कि क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या यह केवल एक राजनीतिक पैंतरा है? भारत के साथ व्यापारिक तनाव और आंतरिक भ्रष्टाचार के दोहरे मोर्चे पर घिरी यह सरकार अब कैसे खुद को बचाती है, इस पर पूरे दक्षिण एशिया की नजर है. फिलहाल, नेपाल की राजनीति में अनिश्चितता का दौर शुरू हो चुका है और आने वाले दिन बालेन शाह के राजनीतिक भविष्य को तय करेंगे.