Jharkhand News: झारखंड की ऊर्जा जरूरतों का ग्राफ आने वाले समय में तेजी से ऊपर जाने वाला है. ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2030-31 तक राज्य की "पीक डिमांड" (सर्वाधिक मांग) 3852.42 मेगावाट के नए शिखर को छू लेगी. यह वर्तमान मांग की तुलना में करीब 678 मेगावाट की बड़ी वृद्धि होगी. अनुमान है कि साल 2026-27 में मांग 3174 मेगावाट से शुरू होकर हर साल औसतन 150 से 200 मेगावाट की दर से बढ़ेगी. बढ़ते शहरीकरण, नए उद्योगों की स्थापना और कृषि क्षेत्र में बिजली की बढ़ती सक्रियता को इस भारी उछाल का मुख्य कारण माना जा रहा है.
लाइन लॉस और बिजली चोरी रोकने पर 4120 करोड़ का मेगा प्लान
सिर्फ बिजली की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे बिना किसी नुकसान के उपभोक्ताओं तक पहुंचाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है. राज्य में तकनीकी खामियों और बिजली चोरी (लाइन लॉस) को कम करने के लिए 4120.39 करोड़ रुपये का एक महत्वाकांक्षी बजट तैयार किया गया है. इस भारी-भरकम राशि में केंद्र सरकार 2087.5 करोड़ रुपये की सहायता देगी, जबकि राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी के रूप में 2032.79 करोड़ रुपये खर्च करेगी. इस फंड का मुख्य उद्देश्य पुराने और जर्जर बिजली के तारों को बदलना और वितरण प्रणाली को इतना मजबूत करना है कि बिजली की छीजत न्यूनतम हो सके.
स्मार्ट मीटरिंग और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर जोर
इस निवेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा तकनीक को आधुनिक बनाने में इस्तेमाल होगा. सरकार ने स्मार्ट मीटरिंग योजना के लिए 858.02 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसके तहत फीडर, ट्रांसफार्मर और आम उपभोक्ताओं के परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे. इससे न केवल सटीक बिलिंग सुनिश्चित होगी, बल्कि बिजली की बर्बादी पर भी लगाम लगेगी. इसके अतिरिक्त, वितरण ढांचे को पूरी तरह हाईटेक बनाने और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण कार्यों में 3262.27 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, ताकि भविष्य में राज्य के किसी भी हिस्से में बिजली की ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या न रहे.
55 लाख उपभोक्ताओं का बढ़ता नेटवर्क और बिजली का गणित
झारखंड में वर्तमान में बिजली उपभोक्ताओं की कुल संख्या 55 लाख 37 हजार 750 तक पहुंच गई है, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या सबसे अधिक 49.39 लाख है. इसके अलावा 4.43 लाख कॉमर्शियल और 1.21 लाख कृषि उपभोक्ता इस नेटवर्क का हिस्सा हैं. उद्योगों की बात करें तो 29 हजार से अधिक लो टेंशन और करीब 2600 हाईटेंशन (HT) कनेक्शन राज्य की अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं. इतने विशाल और विविध उपभोक्ता आधार को 2031 तक निर्बाध बिजली प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे को समय रहते तैयार किया जा रहा है.