Jharkhand Political News: रांची स्थित झारखंड कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में पार्टी की ग्रामीण इकाई ने प्रेस वार्ता कर कई राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखी. ग्रामीण जिला अध्यक्ष सोमनाथ मुंडा ने केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाते हुए महिला आरक्षण बिल, संसद के विशेष सत्र और परिसीमन जैसे विषयों पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी.
समनाथ मुंडा महिला आरक्षण बिल पर उठाये सवाल, “राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश”सोमनाथ मुंडा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण बिल को जिस तरह पेश किया गया, वह गंभीर नीति से ज्यादा राजनीतिक रणनीति लगती है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिल को जल्दबाजी में लाया गया, लेकिन इसके लागू होने को लेकर अब तक कोई स्पष्ट रोडमैप या समय-सीमा सामने नहीं आई है.
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सितंबर 2023 में यह विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ था, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है. भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के खिलाफ गलत धारणा बनाई जा रही है, जबकि कांग्रेस हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्ष में रही है.
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिलाने की पहल कांग्रेस की ही देन है, जिसके चलते आज बड़ी संख्या में महिलाएं पंचायतों में नेतृत्व कर रही हैं.
संसद के विशेष सत्र और परिसीमन पर उठाए गंभीर सवाल, चुनाव आयोग से की मांग
प्रेस वार्ता में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई. मुंडा ने कहा कि जब देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, ऐसे समय में संसद का विशेष सत्र बुलाना सवाल खड़े करता है. उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में संज्ञान लेने की मांग की. परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि इसे लागू करने से पहले जनगणना पूरी होना जरूरी है, ताकि सभी क्षेत्रों को निष्पक्ष प्रतिनिधित्व मिल सके. बिना आंकड़ों के आधार पर किया गया कोई भी परिसीमन असंतुलन पैदा कर सकता है.
महिला नेताओं की भागीदारी, केंद्र की नीतियों पर सामूहिक विरोध
इस प्रेस वार्ता में जिला इकाई की कई महिला नेता भी मौजूद रहीं. उन्होंने भी महिला आरक्षण और अन्य मुद्दों पर अपनी चिंता जाहिर की और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए. नेताओं का कहना था कि महिलाओं के नाम पर राजनीति करने के बजाय उन्हें वास्तविक अधिकार और अवसर दिए जाने चाहिए.
कांग्रेस की इस प्रेस वार्ता ने यह साफ कर दिया कि पार्टी आने वाले समय में महिला आरक्षण, चुनावी प्रक्रिया और परिसीमन जैसे मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाने वाली है. साथ ही केंद्र सरकार से इन विषयों पर स्पष्टता और जवाबदेही की मांग भी तेज होने की संभावना है.