Jharkhand News झारखंड में पांच वर्ष से कम उम्र के लगभग 68 प्रतिशत बच्चे एनीमिया के शिकार हैं, जिसका अर्थ है कि इन बच्चों में हीमोग्लोबिन का स्तर मानक 11 जी/डीएल से काफी कम है. एनएफएचएस-5 के आंकड़े बताते हैं कि 34.3 प्रतिशत बच्चों में खून का स्तर मात्र 7 से 10 जी/डीएल के बीच है, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की ओर इशारा करता है. इस संकट के बावजूद, राज्य में आयरन और फोलिक एसिड (आईएफए) की खुराक देने के लिए संचालित “एनीमिया मुक्त भारत” कार्यक्रम की स्थिति काफी लचर बनी हुई है. आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक पांच साल तक के केवल 66 फीसदी बच्चों को ही जरूरी खुराक मिल सकी है, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 के शुरुआती दौर में यह आंकड़ा और भी कम (58%) रहा था.
धनबाद और जामताड़ा का बेहतर प्रदर्शन, हजारीबाग भी शीर्ष में
जिलों की प्रदर्शन रैंकिंग (स्कोर कार्ड) के अनुसार, राज्य के कुछ जिलों ने एनीमिया नियंत्रण की दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं. धनबाद जिला 91.1 फीसदी ओवरऑल स्कोर के साथ पूरे राज्य में शीर्ष पर बना हुआ है, जहां 5-9 साल के 95 फीसदी बच्चों तक आईएफए की पहुंच सुनिश्चित की गई है. इसी क्रम में जामताड़ा 83 फीसदी के साथ दूसरे और दुमका व सिमडेगा 82.5 फीसदी स्कोर के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे हैं. हजारीबाग ने भी 81.5 फीसदी की उपलब्धि के साथ शीर्ष पांच जिलों में अपनी जगह बनाई है. इन जिलों में छह माह से पांच साल तक के बच्चों के बीच खुराक का वितरण 64 फीसदी से 77 फीसदी के बीच दर्ज किया गया है.
गढ़वा, रांची और बोकारो की स्थिति सबसे खराब
दूसरी ओर, राज्य के कई महत्वपूर्ण जिले एनीमिया नियंत्रण के मामले में काफी पिछड़े नजर आ रहे हैं. गढ़वा जिला 66.2 फीसदी के सबसे कम ओवरऑल स्कोर के साथ प्रदर्शन सूची में अंतिम पायदान पर है, जहां 6-59 माह के केवल 39 फीसदी बच्चों को ही कवर किया जा सका है. राजधानी रांची की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है और यह 66.4 फीसदी स्कोर के साथ निचले पांच जिलों में शामिल है. इसी प्रकार, साहिबगंज (67.2%), कोडरमा (68%) और बोकारो (68.5%) में भी आईएफए संपूरण की स्थिति अत्यंत धीमी है. इन जिलों में खासकर छोटे बच्चों और धात्री महिलाओं के बीच दवाओं का वितरण लक्ष्य से काफी नीचे रहा है.
प्रशासनिक सख्ती: सिविल सर्जनों को सुधार का अल्टीमेटम
कार्यक्रम में बरती जा रही इस भारी शिथिलता और आंकड़ों के संभावित हेरफेर को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), झारखंड ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. राज्य नोडल पदाधिकारी (शुशु स्वास्थ्य कोषांग) ने स्कोर कार्ड के साथ पत्र भेजकर जिला और प्रखंड स्तर पर स्वास्थ्य, समाज कल्याण और स्कूली शिक्षा विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाने का अनुरोध किया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और एनीमिया मुक्त भारत के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी विभागों को मिलकर “आईएफए संपूरण” की स्थिति में तत्काल सुधार लाना होगा.