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  • 2026-04-19

Jamshedpur News: चाय हमले की शिकार हुई मेहंदी कुमारी को टीएमएच से मिला डिस्चार्ज, कंपनी ने साफ किया- बिल माफी में किसी नेता या एनजीओ की नहीं रही कोई भूमिका

Jamshedpur: बिष्टुपुर में अपराधियों द्वारा चाय फेंककर जलाने की घटना के बाद घायल हुई मेहंदी कुमारी के मामले में टाटा स्टील प्रबंधन ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया है। टीएमएच में इलाजरत मेहंदी कुमारी को अब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, वहीं उनके इलाज का बकाया 34,054 रुपये पूरी तरह माफ कर दिया गया है। टाटा स्टील की ओर से जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि इस बिल माफी में किसी भी राजनेता, विधायक या किसी एनजीओ की कोई भूमिका नहीं रही है। कंपनी ने यह निर्णय पूरी तरह अपने स्तर पर लिया है।

इलाज के दौरान बना था बड़ा आर्थिक बोझ, कंपनी ने किया पूरा सहयोग
बताया जा रहा है कि मेहंदी कुमारी को 6 अप्रैल 2026 को गर्म चाय से गंभीर रूप से झुलसने के बाद टीएमएच के बर्न केयर यूनिट और प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया था, जहां अस्पताल के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उनका समुचित इलाज किया गया। इलाज के बाद अब उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। कुल अस्पताल बिल 61,554 रुपये बना था, जिसमें से परिवार ने 27,500 रुपये का भुगतान कर दिया था, जबकि शेष 34,054 रुपये का भुगतान करने में असमर्थता जताई गई थी।

आर्थिक स्थिति को देखते हुए लिया गया फैसला
मेहंदी कुमारी का परिवार चाय स्टॉल चलाकर अपना गुजारा करता है और निम्न आय वर्ग से जुड़ा हुआ है। ऐसे में बकाया राशि का भुगतान कर पाना उनके लिए संभव नहीं था। इस स्थिति को देखते हुए टाटा स्टील प्रबंधन ने पूरी संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेते हुए शेष राशि को पूरी तरह माफ कर दिया और बिना किसी बकाया के उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

बयानबाजी और हकीकत के बीच अंतर भी आया सामने
घटना के बाद शहर के कई विधायकों और राजनीतिक नेताओं ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर पीड़िता की मदद करने और इलाज का खर्च उठाने की बातें कही थीं। हालांकि, वास्तविकता में परिवार को किसी भी नेता या संगठन से आर्थिक मदद नहीं मिली। टाटा स्टील ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह राहत पूरी तरह कंपनी की पहल है और इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की भूमिका नहीं है।

टाटा स्टील की पहल से मजबूत हुई भरोसे की छवि
इस पूरे घटनाक्रम के बाद आम लोगों के बीच टाटा स्टील की छवि और मजबूत हुई है। कठिन परिस्थितियों में जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आकर कंपनी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वह सामाजिक जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाती है और वास्तविक जरूरत के समय लोगों के साथ खड़ी रहती है।
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