राज्य में बढ़ी हुई बिजली दरों के विरोध में आम लोगों से लेकर व्यापारियों और उद्योग जगत तक में भारी नाराजगी देखी जा रही है। बिजली शुल्क में वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ कृषि क्षेत्र पर भी पड़ा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है। बढ़े हुए बिजली बिलों से परेशान जनता अब सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। इसी क्रम में प्रदर्शनकारियों ने विद्युत जीएम का घेराव भी किया।
भाजपा का सरकार पर हमला, मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा तेज
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में आम आदमी के लिए बढ़े हुए दरों का बोझ उठाना संभव नहीं है। इस विरोध को राज्य सरकार के लिए चेतावनी और जनाक्रोश का संकेत माना जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यदि जल्द ही बिजली दरों में वृद्धि को वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी आंदोलन को और व्यापक रूप देगी। भाजपा का कहना है कि ऐसी स्थिति के लिए पूरी तरह राज्य सरकार जिम्मेदार होगी।
प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से भाजपा ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से बढ़े हुए बिजली दर को तत्काल वापस लेने, 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, जले हुए ट्रांसफार्मरों को शीघ्र बदलने और मरम्मत के नाम पर बार-बार होने वाली बिजली कटौती पर रोक लगाने की मांग शामिल है।
इसके अलावा पार्टी ने पोस्टपेड स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से की जा रही कथित मनमानी वसूली को बंद करने की भी मांग की है। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर राज्य में सियासी माहौल गरमाता जा रहा है और आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।