Chandil News: तमोलिया पंचायत के रुगड़ी गांव में साधू सरदार द्वारा अपनी रैयती जमीन पर चारदीवारी निर्माण कराने के बाद विवाद गहरा गया. निर्माण कार्य के दौरान किसी ने आपत्ति नहीं जताई थी, लेकिन काम पूरा होने के बाद प्रेम सिंह भूमिज ने अचानक जमीन पर अपना हक जताते हुए दावा ठोक दिया. मालिकाना हक को लेकर बढ़ते तनाव को देखते हुए साधू सरदार ने न्याय के लिए ग्राम प्रधान और स्थानीय आदिवासी संगठनों का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद मामले को सुलझाने के लिए ग्राम सभा की विशेष बैठक बुलाई गई.
ग्राम सभा से नदारद रहे दावेदार प्रेम सिंह भूमिज
विवाद के समाधान के लिए आयोजित ग्राम सभा में दोनों पक्षों को साक्ष्यों के साथ उपस्थित होने की सूचना दी गई थी. बैठक में साधू सरदार और खतियानधारी के वंशज अपने दस्तावेजों के साथ पहुंचे, लेकिन अपना हक जताने वाले प्रेम सिंह भूमिज बैठक में उपस्थित नहीं हुए. उनकी अनुपस्थिति के बावजूद आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.
दस्तावेजों और वंशावली ने खोला जमीन का सच
बैठक के दौरान खतियानधारी के वंशजों ने स्पष्ट किया कि खाता संख्या 205 और प्लॉट संख्या 322 की यह विवादित जमीन मूल रूप से "सुरु भूमिज" के नाम पर दर्ज है. कागजी साक्ष्यों और वंशावली के मिलान से यह प्रमाणित हुआ कि खतियान में अंकित व्यक्ति साधू सरदार के मामा थे. दस्तावेजों की गहन जांच के बाद यह साफ हो गया कि कानूनी और सामाजिक रूप से इस भूखंड पर साधू सरदार का ही अधिकार बनता है और प्रेम सिंह भूमिज का दावा आधारहीन है.
ग्राम सभा का अंतिम निर्णय और भविष्य की रणनीति
ग्राम प्रधान की अनुपस्थिति में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर साधू सरदार को जमीन का असली हकदार घोषित कर दिया. सभा ने स्पष्ट कहा कि वंशावली और खतियानी साक्ष्य साधू सरदार के पक्ष में हैं. हालांकि ग्राम सभा ने अपना सामाजिक फैसला सुना दिया है, लेकिन अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दूसरा पक्ष इस निर्णय को स्वीकार करता है या यह विवाद प्रशासनिक दहलीज और कोर्ट-कचहरी तक पहुंचता है.