Jharkhand News: झारखंड की आर्थिक स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। हाल ही में समाप्त वित्तीय वर्ष की समीक्षा से ये पता चला है कि राज्य के राजस्व में 15,043.17 करोड़ रुपये की कमी हुई है। कुल 1,25,666.72 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले केवल 1,10,623.55 करोड़ ही प्राप्त हो सके। इस कमी का सीधा असर विकास योजनाओं पर पड़ा है, जिससे कई परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं और खर्च करने की क्षमता भी सीमित हो गई है।
हर क्षेत्र में लक्ष्य से कम आय, वाणिज्यकर सबसे ज्यादा प्रभावित
सेक्टर आधारित विश्लेषण में सामने आया कि केंद्रीय करों और अनुदानों में 5,935 करोड़ की कमी रही। राज्य के स्वकर में 4,800.25 करोड़ और गैर कर में 4,290.80 करोड़ की कमी दर्ज की गई। खास बात यह रही कि वाणिज्यकर विभाग, जो राज्य का प्रमुख राजस्व स्रोत है, उसे 26,128 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 5,101 करोड़ कम प्राप्त हुए। जीएसटी दरों में बदलाव को इसका एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
खनिज संपदा के बावजूद कमाई में पिछड़ता राज्य
खनिज संपदा में समृद्ध होने के बावजूद झारखंड अपेक्षित राजस्व नहीं जुटा पा रहा है। 2025-26 में खनिज रॉयल्टी से 15,500 करोड़ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन केवल 11,860 करोड़ ही प्राप्त हुए। यह स्थिति तब है जब पड़ोसी राज्य ओडिशा लगभग 50,000 करोड़ और छत्तीसगढ़ 16 से 17 हजार करोड़ की आय खनिज क्षेत्र से अर्जित कर रहे हैं। इससे ये स्पष्ट है कि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की जरूरत है।
आगे की राह चुनौतीपूर्ण, आय बढ़ाना बड़ी जिम्मेदारी
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य ने स्वकर का लक्ष्य 46,000 करोड़ रखा है, जिसे हासिल करना आसान नहीं दिखता। केंद्र से मिलने वाले अनुदानों में कटौती और योजनाओं में हिस्सेदारी घटने से वित्तीय दबाव और बढ़ गया है। नीति आयोग ने भी राज्य को आय के नए स्रोत बढ़ाने की सलाह दी है। ऐसे में विभिन्न राजस्व विभागों के बीच बेहतर समन्वय और ठोस रणनीति बनाना बेहद जरूरी हो गया है, अन्यथा आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।