Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने कुख्यात नक्सली संगठन पीएलएफआई (PLFI) के सदस्य सुलेमान सांडी पूर्ति की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति पर हत्या, आगजनी और रंगदारी जैसे 26 गंभीर मामले दर्ज हों, उसे जमानत देना समाज की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होगा. अदालत ने उसे एक “दुर्दांत अपराधी” की श्रेणी में रखते हुए उसके पक्ष में फैसला देने से इनकार कर दिया. हालांकि, जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुलेमान ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल अपील दाखिल की है, जिस पर फिलहाल सुनवाई जारी है.
AK-47 और हथियारों के जखीरे के साथ हुआ था गिरफ्तार
सुलेमान सांडी पूर्ति को पुलिस ने 1 जनवरी 2021 को एक बड़े सर्च ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किया था. उसके पास से सुरक्षा बलों ने एके-47 (AK-47) राइफल, 315 बोर की राइफलें, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस, मैगजीन और दर्जनों मोबाइल फोन व चार्जर बरामद किए थे. गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने स्वीकार किया था कि वह नक्सली सरगना लाका पाहन के इशारे पर काम करता था. उसने मुरहू इलाके में सड़क निर्माण कार्य में लगी जेसीबी, ट्रैक्टर और अन्य मशीनों को आग के हवाले करने और दहशत फैलाने के लिए अंधाधुंध फायरिंग करने की वारदातों को अंजाम दिया था.
NIA की जांच और चार्जशीट में बड़ा खुलासा
पीएलएफआई के खिलाफ चल रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में सुलेमान की भूमिका अहम मानी गई है. एनआईए ने अदालत को सूचित किया है कि सुलेमान संगठन के मनी ट्रेल और गतिविधियों का मुख्य हिस्सा रहा है. एजेंसी ने सुलेमान सहित संगठन के कई बड़े चेहरों के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल कर दी है. एनआईए की रिपोर्ट के अनुसार, सुलेमान न केवल मैदानी वारदातों में शामिल था, बल्कि लेवी (रंगदारी) के पैसों के प्रबंधन में भी उसकी भूमिका संदिग्ध रही है.