RIMS Land Scam: रिम्स की जमीन के फर्जी दस्तावेज बनाकर खरीद-बिक्री करने के मामले में एसीबी की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. ब्यूरो ने इस घोटाले में शामिल 16 अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार से औपचारिक अनुमति मांगी है. जांच में खुलासा हुआ है कि गलत वंशावली के आधार पर रिम्स की बेशकीमती जमीन को महज 31 लाख रुपये में एक बिल्डर को बेच दिया गया था. इस कार्रवाई की जद में अंचल अधिकारी (CO) राजेश कुमार, अंचल निरीक्षक श्याम किशोर प्रसाद और कर्मचारी मनोज कुमार समेत कई रसूखदार नाम शामिल हैं, जिन पर अब गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.
बिल्डर और दलाल समेत 4 गिरफ्तार, अपार्टमेंट निर्माण का भी खुलासा
एसीबी ने इस मामले में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए मंगलवार को जमीन दलाल और बिल्डर सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. जांच में यह बात सामने आई है कि विवादित जमीन पर नियमों को ताक पर रखकर अपार्टमेंट का निर्माण भी कराया गया था, जिसमें जमीन मालिक को भी हिस्सा दिया गया. एजेंसी अब इस पूरे प्रकरण में सरकारी कर्मियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है और इसके लिए मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग से भी लगातार मार्गदर्शन लिया जा रहा है. मामले में अब तक हुई गिरफ्तारियों ने भू-माफिया और अधिकारियों के बीच के गहरे गठजोड़ को उजागर कर दिया है.
दस्तावेजों की जांच जारी, बढ़ सकता है कार्रवाई का दायरा
एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों और अवैध कन्वर्जन की जांच अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में कई और रसूखदार लोग जांच के घेरे में आ सकते हैं. ब्यूरो का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पहचान की जा रही है. जांच की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, रिम्स की जमीन हड़पने के इस बड़े नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं. सरकार से अनुमति मिलते ही आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा और कसने की पूरी संभावना है.