Jharkhand News: झारखंड सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से की जा रही फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए "शुल्क निर्धारण एवं विनियमन समितियों" के गठन का सख्त निर्देश दिया है. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अपर सचिव सीता पुष्पा ने सभी जिलों के उपायुक्तों और शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र लिखकर इस दिशा में अविलंब कार्रवाई करने को कहा है. इन समितियों का मुख्य उद्देश्य निजी स्कूलों की वित्तीय गतिविधियों पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करना है, ताकि अभिभावकों को स्कूलों द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण से बचाया जा सके और शिक्षा के नाम पर हो रही मनमानी वसूली पर कानूनी लगाम कसी जा सके.
विभागीय लापरवाही पर जताई नाराजगी, केवल तीन जिलों ने दी अब तक रिपोर्ट
सरकार ने पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन न होने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है. विभाग के अनुसार, अब तक केवल रामगढ़, पाकुड़ और गोड्डा जिलों ने ही विद्यालय स्तरीय समितियों की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है, जबकि शेष जिलों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है. विभाग ने इस सुस्ती को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा. सभी जिलों को 15 दिनों के भीतर न केवल समितियों का गठन करना होगा, बल्कि उनकी कार्यप्रणाली और क्रियाशीलता की विस्तृत रिपोर्ट भी मुख्यालय को भेजनी होगी.
अभिभावकों को मिलेगी बड़ी राहत, वित्तीय ऑडिट के दायरे में होंगे स्कूल
इन समितियों के सक्रिय होने से निजी स्कूलों के लिए बिना ठोस आधार के फीस बढ़ाना नामुमकिन हो जाएगा. जिला स्तरीय समितियां स्कूलों के खर्च और बुनियादी सुविधाओं का ऑडिट कर सकेंगी, जिससे फीस निर्धारण में पारदर्शिता आएगी. विभाग का यह कदम नए शैक्षणिक सत्र में दाखिला लेने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तय समय सीमा के भीतर समितियों का गठन न करने वाले जिलों के शिक्षा अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है.