Tata Steel Wage Revision: टाटा स्टील के हजारों कर्मचारियों का बहुप्रतीक्षित वेतन समझौता (Wage Revision) अब अंतिम पड़ाव पर है. टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी के जमशेदपुर लौटते ही प्रबंधन और यूनियन के बीच बुधवार से औपचारिक चर्चाओं का दौर फिर से शुरू हो गया है. समझौते को निर्णायक रूप देने के लिए प्रबंधन ने 9 अप्रैल को कलिंगानगर यूनिट के प्रतिनिधियों को भी जमशेदपुर बुलाया है. इस संयुक्त बैठक का मुख्य उद्देश्य जमशेदपुर और कलिंगानगर, दोनों इकाइयों के लिए एक संतुलित और न्यायसंगत वेतन संरचना तैयार करना है, ताकि सभी कर्मचारियों को समान लाभ मिल सके.
7 साल का होगा समझौता, मई के पहले हफ्ते में लग सकती है मुहर
अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यदि आगामी बैठकों में सहमति बन जाती है, तो मई के पहले सप्ताह तक आधिकारिक तौर पर समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. यह समझौता पिछले बार की तरह ही 7 वर्षों की अवधि के लिए होने के संकेत मिल रहे हैं. वर्तमान में सबसे अधिक चर्चा एमजीबी (Minimum Guaranteed Benefit) के प्रतिशत को लेकर है. यूनियन ओल्ड ग्रेड (S-1) के लिए कम से कम 23% और न्यू सीरीज (NS-7) के कर्मचारियों के लिए 27% एमजीबी की मांग कर रही है. इसके पीछे तर्क यह है कि इंक्रीमेंटल वैल्यू और 2018 के वेतन स्तर को ध्यान में रखते हुए यह वृद्धि आवश्यक है.
डीए और इंक्रीमेंट स्लैब पर भी फोकस, प्रबंधन का रुख सकारात्मक
वेतन वृद्धि के अलावा यूनियन महंगाई भत्ते (DA) की प्रति पॉइंट वैल्यू में सुधार और नए ग्रेड के कर्मचारियों के पे-स्लैब विस्तार पर भी प्रबंधन से वार्ता कर रही है. कमेटी मेंबरों का जोर एक ऐसे मॉडल पर है जिससे न केवल वर्तमान सैलरी बढ़े, बल्कि कर्मचारियों के रिटायरमेंट लाभ और करियर ग्रोथ पर भी सकारात्मक असर पड़े. अब तक की चर्चाओं में प्रबंधन का रुख सहयोगी और सकारात्मक रहा है, जिससे कर्मचारियों में भारी उत्साह है. अब सबकी निगाहें 9 अप्रैल की बड़ी बैठक पर टिकी हैं, जहां से वेतन वृद्धि का अंतिम फॉर्मूला निकलकर सामने आ सकता है.