Jharkhand Political News: झारखंड की वित्तीय स्थिति को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि राज्य में वित्तीय कुप्रबंधन अब चरम सीमा पर पहुंच चुका है और सरकार उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है.
बजट खर्च में भारी कमी
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 1,45,400 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था, लेकिन सरकार केवल 1,23,659 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी. उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि बजट का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं होना सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है और इससे राजकोष पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है.
सामाजिक क्षेत्रों में सबसे खराब स्थिति
उन्होंने बताया कि कुल बजट का करीब 15% हिस्सा खर्च ही नहीं हो पाया. वहीं, कई जनकल्याण से जुड़े विभागों में खर्च 50% से 70% के बीच ही सीमित रहा.
सबसे खराब स्थिति इन विभागों की बताई गई:
• स्कूली शिक्षा
• पंचायती राज
• नगर विकास
• कृषि
• स्वास्थ्य
शाहदेव ने कहा कि ये सभी विभाग सीधे आम जनता, खासकर गरीब और अंतिम पायदान पर खड़े लोगों से जुड़े हैं. ऐसे में बजट का उपयोग न होना विकास कार्यों में बड़ी बाधा है.
जनता और कर्मचारियों पर असर
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही का सीधा असर आम जनता, सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि पेंशन भुगतान में देरी और कर्मचारियों के वेतन में बाधा यह साबित करता है कि सरकार की प्राथमिकताएं सही नहीं हैं.
“सरकार के पास न विजन, न इच्छाशक्ति”
प्रतुल शाहदेव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन होता और बजट का सही उपयोग किया जाता, तो राज्य की वित्तीय स्थिति इतनी खराब नहीं होती.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास न तो स्पष्ट विजन है और न ही काम करने की इच्छाशक्ति, जिसके कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं.