Jharkhand News: झारखंड में इस साल मैट्रिक देने वाले 4,23,821 छात्रों के लिए इंटर में दाखिला लेना एक बड़ी चुनौती बन गया है. सरकार ने रांची वीमेंस कॉलेज और मारवाड़ी कॉलेज जैसे 62 प्रमुख अंगीभूत कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई पूरी तरह बंद कर दी है. इन कॉलेजों में हर साल लगभग 90 हजार छात्र नामांकन लेते थे, जिन्हें अब प्लस टू स्कूलों का रुख करना होगा. हालांकि सरकार 642 प्लस टू स्कूलों में पर्याप्त सीटों का दावा कर रही है, लेकिन बड़े शहरों के प्रतिष्ठित स्कूलों में एक-एक सीट के लिए छात्रों के बीच भारी मारामारी और हाई कट-ऑफ की स्थिति बनना तय है.
शिक्षकों की कमी और लैब के अभाव में छात्रों का पलायन
राज्य में इंटर की पढ़ाई के लिए प्लस टू स्कूलों पर निर्भरता तो बढ़ गई है, लेकिन वहां संसाधनों का भारी अभाव है. कई स्कूलों में महज 2 से 3 शिक्षक ही पूरे इंटर सेक्शन को पढ़ा रहे हैं और प्रयोगशालाओं (लैब) की स्थिति भी खराब है. इसी वजह से हर साल लगभग 80 हजार से 1 लाख छात्र बेहतर शिक्षा और जेईई-नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोटा, पटना और दिल्ली जैसे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं. झारखंड में साइंस स्ट्रीम की सीटों और गुणवत्तापूर्ण माहौल की कमी छात्रों को दूसरे राज्यों में जाने पर मजबूर कर रही है.
अवैध नामांकन और सीटों के गणित से भविष्य पर मंडराता खतरा
पिछले सत्र में हुई गड़बड़ियों ने भी नए छात्रों की चिंता बढ़ा दी है. कई वित्तरहित संस्थानों ने तय क्षमता से 3 से 5 गुना ज्यादा छात्रों का नामांकन ले लिया था, जिससे करीब 50 हजार छात्रों का भविष्य अब भी अधर में लटका हुआ है क्योंकि उन्हें जैक (JAC) से अनुमति नहीं मिली है. ग्रामीण इलाकों में सीटें खाली रह जाती हैं, जबकि जमशेदपुर, रांची और धनबाद जैसे शहरी केंद्रों में सीटों का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. ऐसे में छात्रों के लिए इस बार सही और वैध संस्थान में जगह बनाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा.