GST On Fuel: पेट्रोल-डीजल जो हम रोज खरीदते हैं, दरअसल उसकी असली कीमत उतनी ज्यादा नहीं होती जितनी हम देते हैं। असल में कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है टैक्स।इस पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है और राज्य सरकारें VAT जोड़ देती हैं। यानी टैक्स पर भी टैक्स लगता है, इसलिए दाम बढ़ जाते हैं।
कैसे बढ़ जाती है पेट्रोल-डीजल की कीमत
खास बात यह है कि कई बार VAT, एक्साइज ड्यूटी के ऊपर लगाया जाता है, यानी “टैक्स पर टैक्स” लगता है। इसी वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतें 90 रुपये या उससे ज्यादा तक पहुंच जाती हैं, जबकि इनकी बेस वैल्यू करीब 55 से 60 रुपये प्रति लीटर के आसपास होती है।
GST लागू होने पर मिल सकती है बड़ी राहत
अगर इस पूरे टैक्स सिस्टम की जगह सिर्फ GST लागू कर दिया जाए, तो कीमतों में बड़ा बदलाव आ सकता है। अगर पेट्रोल और डीजल पर 12 प्रतिशत लगाया जाता है और बाकी सभी टैक्स हटा दिए जाते हैं, तो पेट्रोल पर करीब 6 से 7 रुपये का टैक्स ही लगेगा। इसके बाद डीलर कमीशन जोड़ने पर पेट्रोल की कीमत लगभग 68 से 70 रुपये प्रति लीटर तक आ सकती है। इसी तरह डीजल की कीमत भी करीब 67 से 68 रुपये प्रति लीटर हो सकती है। यानी मौजूदा कीमतों के मुकाबले करीब 20 रुपये तक की राहत मिल सकती है, जो आम लोगों के लिए काफी बड़ी बात होगी।
28 प्रतिशत GST में भी मिलेगी राहत, लेकिन कम
वहीं अगर पेट्रोल-डीजल पर 28 प्रतिशत GST लागू किया जाए, तो भी कुछ हद तक राहत मिल सकती है। इस स्थिति में पेट्रोल की कीमत करीब 75 सें 80 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत लगभग 72 से 75 रुपये के आसपास हो सकती है। हालांकि यह राहत 12 प्रतिशत GST जितनी ज्यादा नहीं होगी, लेकिन फिर भी वर्तमान कीमतों से कम ही रहेगी। GST का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें केवल एक ही टैक्स लगता है और टैक्स के ऊपर टैक्स नहीं जुड़ता, जिससे कुल लागत कम हो जाती है और उपभोक्ताओं को फायदा मिलता है।
पेट्रोल-डीजल में GST क्यों लागू नहीं होता
हालांकि अब सवाल यह उठता है कि अगर GST से इतना फायदा हो सकता है, तो अभी तक पेट्रोल और डीजल को इस दायरे में क्यों नहीं लाया गया। इसका मुख्य कारण राज्यों की आय है। वर्तमान में राज्य सरकारों को VAT के जरिए पेट्रोल-डीजल से बड़ा राजस्व मिलता है। अगर इन्हें GST में शामिल कर दिया जाता है, तो राज्यों की कमाई पर असर पड़ सकता है। इसलिए यह सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक और वित्तीय संतुलन का भी मामला है।पेट्रोल-डीजल को GST में लाने से आम लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहमति बनना जरूरी है।