Gadgets Addictionon: आज की जिंदगी में मोबाइल, लैपटॉप और वाई-फाई हमारे रोजमर्रा का हिस्सा बन चुके हैं. सुबह उठते ही स्क्रीन और रात को सोने से पहले भी स्क्रीन- यानी गैजेट्स से दूरी लगभग खत्म हो गई है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन डिवाइस से निकलने वाला रेडिएशन खासकर बच्चों के दिमाग पर कितना असर डाल रहा है?
धीरे-धीरे असर करता है रेडिएशन, स्वास्थ्य और मस्तिष्क पर
गैजेट्स से निकलने वाला रेडिएशन तुरंत नुकसान नहीं दिखाता, लेकिन लंबे समय में यह शरीर पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. यह न सिर्फ बच्चों के मानसिक विकास को प्रभावित करता है, बल्कि नींद की गुणवत्ता, एकाग्रता और दिल की सेहत पर भी असर डाल सकता है. इसलिए इसे हल्के में लेना सही नहीं है.
लैपटॉप इस्तेमाल करते समय रखें 1 फिट की दूरी
अक्सर हम आराम के लिए लैपटॉप को गोद में रखकर काम करते हैं, लेकिन यही आदत नुकसानदेह हो सकती है.
कोशिश करें कि लैपटॉप हमेशा टेबल पर रखकर इस्तेमाल करें. अपने शरीर और डिवाइस के बीच कम से कम एक फीट की दूरी रखें. एक्सटर्नल माउस और कीबोर्ड का इस्तेमाल करने से भी रेडिएशन का असर कम किया जा सकता है और आंखों पर भी कम दबाव पड़ता है.
सोते वक्त फोन पास रखना क्यों है, खतरनाक
कई लोग सोते समय मोबाइल को तकिए के पास या अपने पास रखते हैं. यह आदत आपकी नींद और दिमाग दोनों के लिए ठीक नहीं है. फोन से निकलने वाली तरंगें गहरी नींद में बाधा डालती हैं और धीरे-धीरे दिमाग पर असर डालती हैं. बेहतर है कि सोते समय फोन को कम से कम 5-6 फीट दूर रखें या एयरप्लेन मोड पर कर दें.
वाई-फाई राउटर की सही प्लेसमेंट भी रखता है मायने
घर में वाई-फाई राउटर कहां लगा है, यह भी काफी मायने रखता है. इसे कभी भी बेडरूम या बच्चों के खेलने- पढ़ने वाली जगह के पास न रखें. कोशिश करें कि राउटर को घर के खुले हिस्से या दीवार के किनारे लगाया जाए, ताकि उसका असर कम हो.
बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना क्यों है जरूरी
बच्चों का दिमाग काफी संवेदनशील होता है, इसलिए उन्हें ज्यादा समय तक गैजेट्स के संपर्क में रखना सही नहीं है.
उनके लिए आउटडोर खेल, किताबें और अन्य एक्टिविटीज को बढ़ावा देना ज्यादा फायदेमंद होता है.
टेक्नोलॉजी हमारी जरूरत है, लेकिन उसका सही इस्तेमाल करना हमारी जिम्मेदारी है. छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके हम खुद को और अपने बच्चों को इस "अदृश्य खतरे" से काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं.