AAP Controversy: आम आदमी पार्टी में मचे घमासान के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बागी सुरों ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक की सियासत में हलचल तेज कर दी है. चड्ढा के "खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं" जैसे बयानों के बाद पार्टी के तेवर भी बेहद कड़े नजर आ रहे हैं. “आप” नेता सौरभ भारद्वाज और अनुराग ढांडा ने चड्ढा पर आरोपों की बौछार करते हुए साफ कहा है कि राघव चड्ढा अब अरविंद केजरीवाल के वफादार सिपाही नहीं रहे हैं और वे सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने से घबराने लगे हैं. ढांडा ने तंज कसते हुए कहा कि निडरता “आप” की पहली पहचान है और जो डर जाए, वो देश के लिए क्या लड़ेगा.
योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण से शुरू हुआ था किनारा करने का दौर
राघव चड्ढा उन दिग्गजों की फेहरिस्त में शामिल होते दिख रहे हैं, जिन्होंने कभी अरविंद केजरीवाल के कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी खड़ी की थी, लेकिन बाद में किनारे कर दिए गए या खुद अलग हो गए. इसकी शुरुआत मार्च 2015 में हुई, जब पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. दोनों नेताओं ने तब केजरीवाल पर तानाशाही और लोकतंत्र की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए थे. वरिष्ठ वकील शांति भूषण और “एक व्यक्ति, एक पद” की मांग उठाने वाले प्रोफेसर आनंद कुमार को भी धीरे-धीरे पार्टी की मुख्यधारा से काटकर दरकिनार कर दिया गया था.
स्वाति मालीवाल और कुमार विश्वास भी कर चुके हैं बगावत
मई 2024 में दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने भी “आप” नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. मालीवाल ने केजरीवाल के निजी सचिव बिभव कुमार पर मुख्यमंत्री आवास में 8 थप्पड़ मारने और मारपीट करने का संगीन आरोप लगाया था. इस मामले में पार्टी ने आरोपी सचिव का समर्थन किया, जिसके बाद मालीवाल बागी हो गईं. वहीं, पार्टी के सबसे लोकप्रिय चेहरों में से एक रहे मशहूर कवि कुमार विश्वास को भी मतभेदों के चलते दरकिनार किया गया. कुमार विश्वास को पंजाब चुनाव में प्रचार करने से रोका गया और अंततः उन्हें पार्टी से इस्तीफा देना पड़ा.
आशुतोष से लेकर मयंक गांधी तक छोड़ चुके हैं साथ
इस फेहरिस्त में पत्रकारिता छोड़कर राजनीति में आए आशुतोष, शाजिया इल्मी, मयंक गांधी और विनोद कुमार बिन्नी जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं. शाजिया इल्मी ने तो केजरीवाल पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी और अब वे भाजपा में हैं. वहीं, अन्ना आंदोलन के समय से ही केजरीवाल के साथ जुड़े विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने दिल्ली में सरकार बनने के बाद सबसे पहले बगावत की थी, जिसके चलते उन्हें निकाल दिया गया था. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या राघव चड्ढा भी इन्हीं पुराने दिग्गजों की तरह पार्टी से पूरी तरह बेदखल कर दिए जाएंगे या वे अपनी इस खामोशी को किसी बड़े सियासी तूफान में बदलेंगे.