पुलिस के अनुसार घटना 24 मार्च 2026 की रात की है। मंगला जुलूस के दौरान बच्ची अचानक लापता हो गई थी। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन के बाद भी उसका कोई पता नहीं चल सका। अगले दिन 25 मार्च की सुबह करीब 8:30 बजे कुसुम्भा गांव स्थित मध्य विद्यालय के पीछे बांस झाड़ी में बच्ची का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।
मृतका की माँ रेशमी देवी के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए 26 मार्च को झारखंड पुलिस के निर्देश पर विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया।
तकनीकी जांच में खुला राज
एसआईटी की तकनीकी जांच, स्थानीय सूचना और संदिग्धों से पूछताछ के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि मृतका की माँ अपने बेटे की शारीरिक और मानसिक समस्या को लेकर परेशान थी और इसी दौरान वह गांव की शांति देवी उर्फ भगतिनी के संपर्क में आई, जो तंत्र-मंत्र करती थी।
भगतिनी ने महिला को झांसा दिया कि बेटे की परेशानी दूर करने के लिए किसी कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी और इसके लिए रामनवमी की अष्टमी तिथि को शुभ बताया गया।
मंगला जुलूस की रात रची गई साजिश
योजना के तहत 24 मार्च की रात मंगला जुलूस के दौरान रेशमी देवी अपनी ही बेटी को बहला-फुसलाकर भगतिनी के घर ले गई। वहां पूजा-पाठ के बाद रात करीब 9:30 बजे बच्ची को बांसवाड़ी ले जाया गया, जहां आरोपी भीम राम और बच्ची की माँ ने मिलकर उसका गला घोंट दिया। इसके बाद तंत्र-मंत्र की आड़ में मृत शरीर के साथ अमानवीय कृत्य किया गया और खून से पूजा की गई।
तीनों आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड में शामिल तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में भीम राम (45 वर्ष), रेशमी देवी (35 वर्ष) और शांति देवी उर्फ भगतिनी (55 वर्ष) शामिल हैं। पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।