Jharkhand Panchayats: झारखंड के इतिहास में पहली बार राज्य की सभी 4345 पंचायतों के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 विकास के मोर्चे पर एक स्वर्णिम काल साबित हुआ है. इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक केंद्र सरकार की ओर से 15वें वित्त आयोग के तहत राज्य को अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक 2254 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि प्राप्त हुई है. अगर इस कुल रकम को राज्य की सभी पंचायतों में बराबर बांटा जाए, तो पिछले एक साल के भीतर हर एकल पंचायत के खाते में औसतन लगभग 51 लाख 80 हजार रुपये की मोटी रकम आएगी. राज्य गठन के बाद से लेकर आज तक ग्रामीण विकास के लिए पंचायतों को सीधे मिलने वाली यह अब तक की सबसे विशालतम राशि है.
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के प्रयासों के बाद दिल्ली से पास हुआ फंड
इस फंड को केंद्र सरकार से झारखंड के हिस्से के रूप में पास कराने के लिए राज्य सरकार को एक बेहद लंबी और जटिल कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा. राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के व्यक्तिगत और अथक प्रयासों, लगातार किए गए पत्राचार के साथ-साथ दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास सचिव और केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद ही अटका हुआ पैसा झारखंड को मिल सका. इसके अलावा यह भी पहला मौका है जब नवगठित राज्य वित्त आयोग ने भी अपनी तरफ से पंचायतों को अतिरिक्त वित्तीय अनुदान जारी किया है.
प्रमंडलों के हिसाब से पैसों का गणित और पिछले 5 सालों का तुलनात्मक डेटा
अगर हम पिछले पांच वित्तीय वर्षों में 15वें वित्त आयोग से झारखंड को मिली किस्तों की तुलना करें, तो मौजूदा साल का आंकड़ा वाकई चौकाने वाला है. साल 2021-22 में राज्य को 624.50 करोड़, 2022-23 में 1271 करोड़, 2023-24 में 1300 करोड़ और 2024-25 में सिर्फ 653.50 करोड़ रुपये ही मिले थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा सीधे 2254 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. प्रमंडलवार (Divisional) इस राशि के वितरण पर नजर डालें तो उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल को सर्वाधिक 767.15 करोड़, संताल परगना को 520.59 करोड़, दक्षिणी छोटानागपुर को 367.78 करोड़, कोल्हान प्रमंडल को 300.44 करोड़ और सबसे पिछड़े माने जाने वाले पलामू प्रमंडल को 294.74 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
टाइड और अनटाइड फंड से बदलेगी सुदूरवर्ती गांवों की तकदीर और तस्वीर
पंचायतों को मिलने वाली इस भारी-भरकम राशि को मुख्य रूप से दो अलग-अलग मदों (Heads) में बांटकर खर्च किया जाएगा ताकि गांवों का चहुंमुखी विकास हो सके. इसमें पहला “टाइड मद” (Tied Fund) होगा, जिसका इस्तेमाल केवल शुद्ध पेयजल की आपूर्ति और स्वच्छता (गांवों को ओडीएफ प्लस बनाने) से जुड़ी अति-आवश्यक बुनियादी योजनाओं पर ही किया जा सकेगा. वहीं दूसरा “अनटाइड मद” (Untied Fund) होगा, जिसके तहत पंचायत के मुखिया और जनप्रतिनिधि अपनी मर्जी और ग्रामीणों की स्थानीय जरूरतों के हिसाब से पीसीसी सड़क, पुल-पुलिया, नाली निर्माण और स्ट्रीट लाइट जैसी विकास योजनाओं का चयन कर उन्हें सीधे धरातल पर उतार सकेंगे.