National News: भारत अब अपने बनाए हुए युद्धपोत (warships) को दुनिया के बाजार में बेचने की तैयारी कर रहा है। भारतीय नौसेना के लिए जो नेक्स्ट जनरेशन मिसाइल वेसल (NGMV) बनाए जा रहे हैं, अब उन्हें मित्र देशों को एक्सपोर्ट करने की योजना है। इन जहाजों का काम होगा दुश्मन के जहाजों को रोकना और समुद्र में सुरक्षा बनाए रखना।
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत का बड़ा डिफेंसिव दांव
मार्च 2026 में भारत ने एक बड़ा फैसला लिया है। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच भारत अब ब्रह्मोस मिसाइल से लैस इन नए युद्धपोतों को बेचने की तैयारी कर रहा है। इससे भारत का रक्षा निर्यात बढ़ेगा और हिंद महासागर के साथ-साथ दूसरे इलाकों में भी भारत की पकड़ मजबूत होगी। इंडोनेशिया जैसे देश इसमें खास दिलचस्पी दिखा सकते हैं।
बढ़ते खतरे के बीच NGMV पर टिकी कई देशों की नजर
दरअसल, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कई देशों को अपनी समुद्री सुरक्षा मजबूत करनी पड़ रही है। खासकर तेल और व्यापार के रास्तों की सुरक्षा अब बड़ी चिंता बन गई है। ऐसे में भारत का ये NGMV कम खर्च में ज्यादा ताकत देने वाला एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आ रहा है।
1450 टन के युद्धपोत में ब्रह्मोस की घातक क्षमता
ये युद्धपोत आकार में छोटे हैं, लेकिन ताकत में बहुत बड़े हैं। करीब 1450 टन वजनी इन जहाजों में 8 ब्रह्मोस मिसाइलें लगाई गई हैं, जो दूर से ही दुश्मन के जहाज या ठिकानों पर सटीक हमला कर सकती हैं। इसके अलावा, इनमें 24 VL-SRSAM मिसाइल, 76mm गन, AK-630M और दूसरे सुरक्षा सिस्टम भी हैं, जो मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाते हैं।
संवेदनशील समुद्री इलाकों के लिए तैयार हाई-टेक वेसल
इन युद्धपोतों की सबसे बड़ी खासियत उनकी स्टेल्थ डिजाइन है, जिससे ये रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आते और होर्मुज स्ट्रेट व रेड सी जैसे संवेदनशील इलाकों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं। ये जहाज 35 नॉट्स की रफ्तार से चलते हैं और करीब 2800 नॉटिकल माइल तक की दूरी तय कर सकते हैं। इस प्रोजेक्ट को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ₹9,804 करोड़ की लागत से बना रही है, जिसमें 6 जहाज तैयार होंगे, जिनकी डिलीवरी 2027 से शुरू होगी और हर जहाज पर 80 से 90 नौसैनिक तैनात रहेंगे।
छोटे लेकिन घातक युद्धपोतों से भारत बढ़ाएगा ग्लोबल दबदबा
इन युद्धपोतों का मुख्य काम दुश्मन के जहाजों को रोकना, समुद्री सुरक्षा बनाए रखना और समुद्री संसाधनों की रक्षा करना है। आज के समय में कई देश बड़े और महंगे जहाजों की बजाय छोटे, तेज और ज्यादा ताकतवर विकल्प तलाश रहे हैं, ऐसे में भारत का NGMV उनके लिए एक शानदार विकल्प बनकर उभर रहा है। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट के तनाव को भारत एक अवसर में बदलते हुए अपने रक्षा निर्यात को तेजी से आगे बढ़ाने में जुटा है।