Political Update: आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद से और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। दोनों 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए चुने गए थे, इसलिए अब उन्हें एक सदन से इस्तीफा देना जरूरी था।
इस्तीफा से पहले सीएम आवास में रही हलचल
नीतीश कुमार और नितिन नवीन अब राज्यसभा में अपनी नई राजनीतिक शुरुआत करेंगे। इस्तीफे से पहले रविवार शाम मुख्यमंत्री आवास में काफी हलचल रही। संवैधानिक नियम के मुताबिक कोई भी नेता सिर्फ 14 दिन तक दो सदनों का सदस्य रह सकता है। इसलिए नीतीश और नितिन को आज ही इस्तीफा देना था।
नीतीश कुमार बने चारों सदनों के प्रतिनिधि
नीतीश कुमार के लिए राज्यसभा जाना खास है। अब वह उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे, जिन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद चारों सदनों में काम किया है। इस्तीफे से पहले जदयू के कई वरिष्ठ नेता सीएम से मिले और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर
नीतीश कुमार ने 1985 में हरनौत (नालंदा) से पहली बार विधायक बनकर राजनीति शुरू की। 1989 में बाढ़ (पटना) से पहली बार लोकसभा पहुंचे। केंद्र में रेल, कृषि और भूतल परिवहन मंत्री रहे। 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री हैं और “सुशासन बाबू”के नाम से जाने जाते हैं।उन्होंने बिहार में शराब बंदी, साइकिल योजना और पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण जैसी लोकप्रिय योजनाओं पर कम किया। राज्यसभा में जाने के बाद नीतीश कुमार उन नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने चारों सदनों में प्रतिनिधित्व किया।
नितिन नवीन का भावुक इस्तीफा
नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा से इस्तीफा देते समय भावुक होते दिखे। उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि बांकीपुर और बिहार के उनके सभी साथी, परिवार और कार्यकर्ताओं के साथ उनका जुड़ाव हमेशा रहेगा। उन्होंने बताया कि जनवरी 2006 में अपने पिता के अचानक निधन के बाद उन्हें पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का मौका मिला। 27 अप्रैल 2006 को पहली बार निर्वाचित होकर उन्होंने राजनीति शुरू की।
नितिन नवीन का भावुक इस्तीफा और नई जिम्मेदारी
पिछले 20 सालों में उन्होंने अपने पिता द्वारा बनाए गए क्षेत्र को बेहतर बनाने की पूरी कोशिश की। अब नई जिम्मेदारी में भी वह अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम करेंगे। नितिन नवीन ने कहा कि उनके कार्यकर्ताओं और जनता के साथ उनका अटूट संबंध हमेशा बना रहेगा, और ये उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा देता रहेगा।