Nepal Politics: नेपाल की राजनीति में शनिवार को उस समय बड़ा उलटफेर हो गया जब नए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पद संभालते ही कड़ा रुख अपनाया. शुक्रवार (27 मार्च 2026) को शपथ लेने के महज 24 घंटे के भीतर, उनकी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार कर लिया. यह कार्रवाई पिछले साल सितंबर में हुए “जेन-जी” (Gen Z) आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले में की गई है.
जेन-जी आंदोलन और 77 मौतों का मामला
सितंबर 2025 में नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं (जेन-जी) का एक विशाल आंदोलन हुआ था. इस दौरान हुई हिंसा और पुलिसिया कार्रवाई में 77 लोगों की जान गई थी और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ था. पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और गृह मंत्री रमेश लेखक को “आपराधिक लापरवाही” का दोषी पाया है. आयोग ने सिफारिश की थी कि इन नेताओं पर भीड़ को नियंत्रित करने में विफल रहने और अत्यधिक बल प्रयोग की अनुमति देने के लिए मुकदमा चलाया जाए.
जेल और 10 से 15 साल की सजा की तैयारी
बालेन शाह की कैबिनेट ने शुक्रवार को अपनी पहली बैठक में ही जांच आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया. पुलिस ने शनिवार सुबह ओली को उनके भक्तपुर स्थित आवास से हिरासत में लिया. रिपोर्ट के अनुसार:
- ओली और लेखक पर मुलुकी अपराध संहिता की धारा 181 और 182 के तहत “आपराधिक लापरवाही” और “गैर-इरादतन हत्या” से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.
- कानूनी जानकारों के मुताबिक, दोष सिद्ध होने पर इन नेताओं को 10 से 15 साल तक की जेल हो सकती है.
- रिपोर्ट में तत्कालीन पुलिस प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है.
राजनीतिक प्रतिशोध या न्याय की शुरुआत?
पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली ने अपनी गिरफ्तारी को “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है और इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है. दूसरी ओर, प्रधानमंत्री बालेन शाह के समर्थकों का कहना है कि यह देश में जवाबदेही तय करने और “पुराने राजनीतिक सिंडिकेट” को खत्म करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. 35 वर्षीय रैपर से नेता बने बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री हैं और उनकी पार्टी (RSP) ने हालिया चुनावों में भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे पर भारी जीत हासिल की है.
नेपाल की राजनीति में नए युग की आहट
इस कार्रवाई के बाद काठमांडू घाटी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. विपक्षी दलों ने इस गिरफ्तारी का विरोध करते हुए आपातकालीन बैठकें बुलाई हैं, जिससे आने वाले दिनों में नेपाल की सड़कों पर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के आसार हैं. बालेन शाह सरकार के इस कदम ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नई सत्ता व्यवस्था में कोई भी “कानून से ऊपर” नहीं होगा.