Ward 17 Adityapur: आदित्यपुर नगर निगम चुनाव के दौरान मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों ने जनता से स्वच्छ और सुंदर शहर बनाने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है. वार्ड संख्या 17 की स्थिति वर्तमान में अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहां सड़कों के किनारे लगे कचरे के ढेर जनप्रतिनिधियों के दावों की पोल खोल रहे हैं. नियमित रूप से कचरा उठाव न होने के कारण पूरा क्षेत्र डंपिंग यार्ड में तब्दील होता जा रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी रोष व्याप्त है.
बदबू और गंदगी से जीना मुहाल, बीमारी का डर
वार्ड 17 में फैली गंदगी से उठने वाली तीव्र दुर्गंध ने लोगों का सांस लेना तक दूभर कर दिया है. कचरे के सड़ने से निकलने वाली जहरीली गैसों और पनपते मच्छरों के कारण क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है. यह समस्या केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि निगम के कई अन्य क्षेत्रों में भी साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने बदलाव की उम्मीद में वोट दिया था, लेकिन अब स्थिति पहले से भी बदतर हो गई है.
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल
जनता की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण आदित्यपुर नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का उदासीन रवैया है. बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद समस्या को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव जीतने के बाद नेता अपनी जिम्मेदारियों को भूल चुके हैं और निगम प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति में व्यस्त है. जनहित के मुद्दों पर इस तरह की चुप्पी सीधे तौर पर निगम की कार्यक्षमता और मंशा पर सवालिया निशान खड़ा करती है.
जवाबदेही का इंतजार: क्या सुधरेगी वार्ड की सूरत?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आदित्यपुर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी और माननीय जनप्रतिनिधि अपनी नींद से जागेंगे? वार्ड 17 की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहती है. यदि समय रहते कचरा प्रबंधन की व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में स्थिति बेकाबू हो सकती है. फिलहाल, जनता के मन में यह टीस बरकरार है कि क्या उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि कभी अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझेंगे या समस्या इसी तरह बनी रहेगी?