Jharkhand News Reservation: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धर्म परिवर्तन और आरक्षण को लेकर उच्चतम न्यायालय के हालिया निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि धर्म बदलने के बाद अनुसूचित जाति से जुड़े संवैधानिक लाभों का दावा नहीं किया जा सकता.
मरांडी ने कहा कि जो व्यक्ति स्वेच्छा से हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर अन्य धर्म अपनाता है, वह उस सामाजिक आधार से बाहर हो जाता है जिसके आधार पर उसे आरक्षण का अधिकार मिला था. ऐसे में उस व्यक्ति द्वारा आरक्षित वर्ग के लाभ लेने की कोशिश संविधान की भावना के अनुरूप नहीं मानी जा सकती.
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में धर्म परिवर्तन को लेकर संगठित प्रयास देखने को मिलते हैं, जिनमें सामाजिक या आर्थिक लाभ की सोच जुड़ी होती है. इस तरह की प्रवृत्तियां न केवल समाज में भ्रम पैदा करती हैं बल्कि आरक्षण व्यवस्था के दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ाती हैं. उन्होंने ऐसे मामलों पर नियंत्रण की आवश्यकता जताई.
मरांडी के अनुसार न्यायालय का यह निर्णय सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांत को मजबूती प्रदान करेगा. इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि आरक्षण का लाभ वास्तव में उन्हीं वर्गों तक पहुंचे, जिनके लिए यह व्यवस्था लागू की गई है.