ED Vs Jharkhand Police: झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस के बीच जारी वर्चस्व की लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के एयरपोर्ट थाने में ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था, जिसे राज्य सरकार ने अब उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है. राज्य सरकार का तर्क है कि स्थानीय पुलिस इस मामले की जांच करने में सक्षम है, जबकि ईडी ने पुलिस की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया है.
सीबीआई ने दर्ज किया नया केस
हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद सीबीआई (CBI) ने बिना वक्त गंवाए इस मामले को टेकओवर कर लिया है. सीबीआई की क्राइम ब्रांच ने एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 5/2026 के आधार पर नई प्राथमिकी RC-03(S)/2026/SC-III/ND दर्ज की है. केंद्रीय एजेंसी अब उन परिस्थितियों की जांच करेगी जिनमें रांची पुलिस ने ईडी कार्यालय में छापेमारी की थी. हाईकोर्ट ने माना था कि जांच एजेंसी के काम में बाधा डालने की नीयत से यह पूरी प्रक्रिया अपनाई गई थी.
मनी लॉन्ड्रिंग आरोपी की शिकायत पर विवाद
इस पूरे विवाद की जड़ में मनी लॉन्ड्रिंग केस का आरोपी संतोष कुमार है, जिसकी शिकायत पर रांची पुलिस ने ईडी के दो बड़े अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. इसके बाद पुलिस ने जिस तरह से ईडी दफ्तर में दबिश दी, उसे लेकर कानूनी सवाल खड़े हुए थे. ईडी ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर इसे जांच अधिकारियों को डराने और मुख्य मामले को भटकाने की साजिश करार दिया था, जिस पर हाईकोर्ट ने मुहर लगाते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी.
प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज
इस मामले ने झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. एक तरफ जहां सीबीआई ने फाइलों को खंगालना शुरू कर दिया है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की उम्मीद कर रही है. यह मामला न केवल जांच एजेंसियों के कार्यक्षेत्र को लेकर अहम है, बल्कि राज्य और केंद्र के बीच बढ़ते टकराव का भी प्रतीक बन गया है. सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस कानूनी खींचतान की भविष्य की दिशा तय करेगा.