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  • 2026-03-22

Jharkhand News: हेमंत सरकार का बड़ा फैसला, रांची में आदिवासियों की जमीन पर नहीं बनेंगे सांसद-विधायकों के आवास

Jharkhand News: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने राजधानी रांची में सांसदों और विधायकों के लिए प्रस्तावित आवासीय परियोजना पर रोक लगा दी है. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भूमिहीनों और आदिवासियों को उजाड़कर जनप्रतिनिधियों के लिए घर बनाना नैतिक और मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है. वित्त सह संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राजस्व, निबंधन और भूमि सुधार विभाग को पत्र लिखकर इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं. रांची उपायुक्त की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है ताकि कमजोर वर्ग के हितों की रक्षा की जा सके.

चुटू मौजा की 35 एकड़ जमीन होगी वापस
पूरा मामला कांके अंचल के मौजा चुटू से जुड़ा है, जहां थाना संख्या-164 और खाता संख्या-118 के तहत आने वाली 35 एकड़ जमीन विधायक-सांसद स्वावलंबी समिति को आवंटित की गई थी. यह जमीन पहले आदिवासियों के नाम पर बंदोबस्त थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था. सरकार ने अब इस बंदोबस्ती को दोबारा बहाल करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही, वित्त मंत्री ने उन अधिकारियों को चिह्नित करने का निर्देश दिया है जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर भूमिहीनों की जमीन की बंदोबस्ती रद्द की थी, ताकि उनके विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सके.

गृह निर्माण समिति ने जमा की थी करोड़ों की राशि
झारखंड विधायक व सांसद गृह निर्माण स्वावलंबी सहकारी समिति ने इस 35 एकड़ गैरमजरूआ जमीन के हस्तांतरण के लिए 14 अप्रैल 2018 को ही 1,70,62,500 रुपये सरकारी खजाने में जमा करा दिए थे. विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कई विधायकों ने जमीन का निबंधन न होने का मुद्दा उठाया था, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार से जवाब मांगा था. हालांकि, जब रांची डीसी की अद्यतन रिपोर्ट सामने आई, तो पता चला कि उक्त भूमि पर पहले से ही गरीब परिवारों का हक था, जिसके बाद सरकार ने आवंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह रोकने का मन बना लिया.

दो महीने के भीतर नई जमीन तलाशने का निर्देश
सरकार ने वीआईपी आवास के प्रोजेक्ट को पूरी तरह खत्म नहीं किया है, बल्कि इसके लिए वैकल्पिक स्थान खोजने को कहा है. वित्त मंत्री ने निर्देश दिया है कि अगले दो महीने के भीतर रांची शहर के आसपास किसी अन्य सुयोग्य भूमि को चिह्नित कर विधायक-सांसद समिति को हस्तांतरित किया जाए. इस फैसले से सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा उनकी प्राथमिकता है. अब प्रशासन पर दबाव है कि वह बिना किसी विवाद वाली जमीन तलाश कर इस लंबे समय से लंबित आवासीय योजना को अमलीजामा पहनाए
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