Tata Workers Union: जमशेदपुर की दो दिग्गज कंपनियों के बीच इन दिनों वेतन समझौते को लेकर तुलनात्मक बहस छिड़ गई है. टाटा मोटर्स में समय से पहले हुए ऐतिहासिक ग्रेड रिवीजन ने टाटा स्टील के कर्मचारियों और यूनियन प्रतिनिधियों पर मानसिक दबाव बना दिया है. जहां टाटा मोटर्स यूनियन ने अपने 7,321 कर्मचारियों के लिए न केवल समय पर समझौता कराया, बल्कि 25 हजार रुपये की एकमुश्त राशि भी पक्की कर दी, वहीं टाटा स्टील में 10,800 कर्मचारियों का वेतन समझौता 1 जनवरी 2025 से ही अधर में लटका हुआ है.
एक माह से वार्ता बंद होने पर उठे सवाल
टाटा वर्कर्स यूनियन के कार्यालय में इन दिनों कमेटी मेंबरों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जो शीर्ष पदाधिकारियों से समझौते की सुस्त रफ्तार पर सवाल पूछ रहे हैं. पिछले एक महीने से प्रबंधन और यूनियन के बीच बैठकों का दौर पूरी तरह बंद है, जिससे कर्मचारियों में अनिश्चितता का माहौल है. कमेटी मेंबरों का तर्क है कि यदि डिजिटल क्रांति के दौर में बोनस जैसे बड़े फैसले ऑनलाइन चर्चा से हो सकते हैं, तो अध्यक्ष की अनुपस्थिति में ग्रेड रिवीजन वार्ता को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा है.
ग्रेड स्ट्रक्चर को एक करने की उठ रही मांग
टाटा मोटर्स में जिस तरह "ई" और "जेओ" ग्रेड को मिलाकर एक नया "टी" ग्रेड बनाया गया है, वैसी ही मांग अब टाटा स्टील के भीतर भी गूंजने लगी है. कोक प्लांट के कमेटी मेंबर आरसी झा सहित कई अन्य प्रतिनिधियों ने मांग की है कि टाटा वर्कर्स यूनियन को भी ओल्ड और न्यू सीरीज के ग्रेड का आपस में विलय कर देना चाहिए. उनका मानना है कि समान काम के लिए दो अलग-अलग वेतन व्यवस्थाओं को खत्म कर एक सुदृढ़ ग्रेड स्ट्रक्चर बनाना ही कर्मचारियों के हित में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा.
एरियर और भत्तों के नुकसान की चिंता
टाटा स्टील के कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चिंता भत्तों और एरियर को लेकर है. चर्चा है कि समझौते में देरी के कारण कर्मचारियों को मिलने वाले नाइट शिफ्ट एलाउंस, एचआरए और अन्य लाभों में होने वाली बढ़ोतरी का पिछला बकाया (एरियर) शायद न मिले. प्लांट के भीतर एलडी-2 जैसे विभागों में कर्मचारी अपने प्रतिनिधियों को घेर रहे हैं, लेकिन यूनियन नेतृत्व फिलहाल इस मामले पर मौन साधे हुए है. अब देखना यह होगा कि टाटा मोटर्स की उपलब्धि के बाद टाटा वर्कर्स यूनियन प्रबंधन के साथ मिलकर कब तक निर्णायक फैसला लेती है.