Jamshedpur: जमशेदपुर के प्रतिष्ठित अधिवक्ता केवल कृष्ण, जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक “केवल बाबू” के नाम से जानते थे, का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर मिलते ही शहर के विधि जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
आपराधिक मामलों में रही मजबूत पकड़
केवल कृष्ण ने अपने लंबे करियर में कई महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों में बचाव पक्ष के वकील के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। उस दौर में जब शहर में अपराध का प्रभाव अधिक था, तब भी उन्होंने अपनी कानूनी दक्षता और तर्कशक्ति के बल पर कई चर्चित मामलों में अहम भूमिका निभाई।
कई वकीलों के मार्गदर्शक रहे
वे सिर्फ एक सफल अधिवक्ता ही नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक भी थे। उनके मार्गदर्शन में कई युवा वकीलों ने कानून के क्षेत्र में कदम रखा और आज वे प्रतिष्ठित अधिवक्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका योगदान विधि क्षेत्र में लंबे समय तक याद किया जाएगा।
झारखंड आंदोलन से भी रहा जुड़ाव
केवल कृष्ण ने झारखंड आंदोलन के दौरान भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने आंदोलनकारियों के पक्ष में कई मामलों की पैरवी की और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाई। इस कारण वे सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी एक सम्मानित व्यक्तित्व रहे।
अधिवक्ताओं ने जताया शोक, दी श्रद्धांजलि
उनके निधन पर झारखंड स्टेट बार काउंसिल के उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला सहित कई अधिवक्ताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त की। इसके साथ ही जमशेदपुर जिला बार संघ के पदाधिकारियों और अनेक वकीलों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।
न्यायिक कार्य से अलग रहेंगे अधिवक्ता
केवल कृष्ण के सम्मान में 23 मार्च को अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से अलग रहने का निर्णय लिया है। इस दौरान सभी वकील उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
विधि जगत में अपूरणीय क्षति
उनके निधन को विधि क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनकी सादगी, पेशेवर ईमानदारी और न्याय के प्रति समर्पण हमेशा लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।