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  • 2026-03-21

Hazaribagh Gas Crisis: हजारीबाग में गैस किल्लत से छात्र बेहाल, लॉज और हॉस्टल बंद होने की कगार पर, छोटे सिलेंडरों की रीफिलिंग पर रोक से मचा हाहाकार

Hazaribagh Gas Crisis: हजारीबाग शहर जो अपनी कोचिंग और शिक्षण संस्थानों के लिए जाना जाता है, वहां इन दिनों हजारों छात्रों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं. जिले के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले करीब दस हजार से अधिक छात्र जो शहर के अलग अलग लॉज और हॉस्टलों में रहकर भविष्य संवार रहे हैं, वे अब भूखे पेट रहने को मजबूर हैं. छोटे सिलेंडरों में गैस की आपूर्ति अचानक बंद होने से इन छात्रों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है और वे दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं.

होटल के खाने ने बिगाड़ा छात्रों का बजट
लॉज में रहने वाले अधिकतर छात्र छोटे सिलेंडरों का उपयोग करते हैं और स्थानीय दुकानों से गैस भरवाकर अपना खाना खुद बनाते हैं. हाल के दिनों में छोटे दुकानदारों के यहां गैस रीफिलिंग बंद होने के कारण छात्रों को बाहर के होटलों का रुख करना पड़ रहा है. सीमित पॉकेट मनी में गुजारा करने वाले इन विद्यार्थियों के लिए रोज होटल का खाना न तो आर्थिक रूप से संभव है और न ही सेहत के लिहाज से ठीक है. ऊपर से गैस संकट के कारण होटलों ने भी खाने की कीमतें बढ़ा दी हैं जिससे छात्रों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.

परीक्षा के समय पढ़ाई पर पड़ रहा बुरा असर
सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान में कई स्कूलों और कॉलेजों में परीक्षाओं का दौर चल रहा है. ऐसे समय में भोजन की तलाश में भटकने के कारण छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है. छात्रों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की व्यवस्था सामान्य नहीं हुई तो उन्हें मजबूरन अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर घर वापस लौटना पड़ेगा. कई लॉज संचालकों ने भी चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो उन्हें अपने हॉस्टल बंद करने पड़ेंगे क्योंकि बिना रसोई के छात्रों का वहां टिकना मुश्किल है.

प्रशासन से हस्तक्षेप की उठ रही मांग
हजारीबाग को एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र माना जाता है जहां पड़ोसी जिलों और राज्यों से भी छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए छात्रों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है. उनकी मांग है कि लॉज और हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए छोटे सिलेंडरों में गैस की सुरक्षित और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए. अब देखना यह है कि प्रशासन इस "छात्रों की बुनियादी समस्या" का समाधान निकालने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है.
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