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  • 2026-03-21

Chaiti Chhath 2026: कल से नहाए खाए के साथ शुरू होगा चैती छठ, चार दिनों तक चलेगा सूर्य उपासना का महापर्व

Chaiti Chhath 2026: चैती छठ हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें भगवान सूर्य और छठी मइया की पूजा की जाती है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। एक कार्तिक माह में और दूसरा चैत्र माह में। चैत्र महीने में मनाया जाने वाला छठ "चैती छठ" कहलाता है, जो श्रद्धा, संयम और कठोर व्रत का प्रतीक है।

कल से शुरू होगा चैती छठ 2026
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैती छठ महापर्व की शुरुआत 22 मार्च 2026 से हो रही है और इसका समापन 25 मार्च 2026 को होगा। यह चार दिनों तक चलने वाला पर्व पूरी विधि-विधान और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है।

चार दिनों का विस्तृत कार्यक्रम
पहला दिन: नहाय-खाय (22 मार्च)
पर्व की शुरुआत "नहाय-खाय" से होती है। इस दिन व्रती स्नान करके शुद्धता के साथ सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। आमतौर पर कद्दू-भात का सेवन किया जाता है, जिससे व्रत की शुरुआत पवित्र मानी जाती है।

दूसरा दिन: खरना (23 मार्च)
दूसरे दिन "खरना" मनाया जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर और रोटी बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जिसमें जल भी ग्रहण नहीं किया जाता।

तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (24 मार्च)
तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। व्रती नदी या तालाब के घाट पर जाकर पूजा करते हैं और सूप में फल, ठेकुआ आदि रखकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। इस दौरान छठी मइया के पारंपरिक गीतों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण (25 मार्च)
अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जिसे "उषा अर्घ्य" कहा जाता है। इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर व्रत का समापन करते हैं, जिसे पारण कहा जाता है।

चैती छठ का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पर्व के दौरान सूर्य देव और छठी मइया की पूजा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। विशेष रूप से संतान की सुरक्षा और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखा जाता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस पर्व को विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

कठोर नियमों और अनुशासन का पर्व
छठ व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इसमें व्रती पूरी शुद्धता और नियमों का पालन करते हैं। स्वच्छता, संयम और तपस्या इस पर्व की मुख्य विशेषताएं हैं।

Disclaimer (अस्वीकरण)
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। किसी भी अनुष्ठान को करने से पहले अपने स्थानीय पंडित या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। इस जानकारी की सटीकता या पूर्णता की पुष्टि News26 नहीं करता है।
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