Gamharia News: स्वच्छ भारत अभियान और साफ-सुथरे प्रशासन के बड़े-बड़े दावे विज्ञापनों और भाषणों में भले ही दमदार लगते हों, लेकिन गम्हरिया प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में कदम रखते ही हकीकत की तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आती है. कार्यालय का सार्वजनिक शौचालय आज अपनी बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है. विडंबना यह है कि जिस परिसर से पूरे क्षेत्र की स्वच्छता और विकास की योजनाएं बनती हैं, वहीं की मूलभूत सुविधाएं दम तोड़ रही हैं.
गंदगी और असहनीय दुर्गंध से जनता बेहाल
कार्यालय परिसर स्थित शौचालय की स्थिति इतनी भयावह है कि वहां कदम रखना भी किसी चुनौती से कम नहीं है. चारों तरफ फैली गंदगी, जलजमाव और वहां से उठने वाली असहनीय दुर्गंध इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि यहां नियमित सफाई की व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है. गौरतलब है कि इस प्रखंड कार्यालय में रोजाना सैकड़ों ग्रामीण और शहरवासी अपने जरूरी सरकारी कार्यों के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें एक अदद साफ शौचालय तक मयस्सर नहीं हो पा रहा है.
स्वच्छता केवल पोस्टरों और नारों तक सीमित
एक ओर जिला प्रशासन स्वच्छता अभियान के नाम पर जागरूकता रैलियां निकालने और पोस्टर चिपकाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर अपने ही नाक के नीचे कार्यालय परिसर की यह दुर्दशा कई गंभीर सवाल खड़े करती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वच्छता अब केवल कागजी खानापूर्ति और सरकारी नारों तक सीमित रह गई है. जनता में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि आखिर करोड़ों के बजट वाले इस अभियान का लाभ धरातल पर क्यों नहीं दिख रहा है.
जिम्मेदारी से बचते अधिकारियों पर उठे सवाल
इस अव्यवस्था के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस नारकीय स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या प्रखंड और अंचल प्रशासन को इस समस्या की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर इस ओर से आंखें मूंद ली गई हैं? यदि शौचालय की साफ-सफाई के लिए फंड आवंटित होता है, तो वह आखिर कहां और कैसे खर्च किया जा रहा है? अधिकारियों की यह चुप्पी प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाती है.
कार्रवाई की मांग, जनता में भारी नाराजगी
कार्यालय आने वाले भुक्तभोगी लोगों ने इस मुद्दे पर कड़ी नाराजगी जताई है. लोगों का साफ कहना है कि "जब प्रमुख सरकारी दफ्तरों की ही यह हालत है, तो आम सार्वजनिक जगहों की स्वच्छता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है." ग्रामीणों ने उपायुक्त से मांग की है कि इस मामले की जांच कराई जाए और जिम्मेदार कर्मचारियों व अधिकारियों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए शौचालय की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए.