Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) एक्ट के तहत अपीलों की समय सीमा को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है. जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अपील निर्धारित 90 दिनों की अधिकतम अवधि के बाद दाखिल की जाती है, तो उसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा. अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि उसके पास इस विशेष कानून के तहत हुई देरी को माफ करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है.
लिमिटेशन एक्ट की दलील को कोर्ट ने किया खारिज
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता अमर यासार की ओर से यह तर्क दिया गया था कि NIA एक्ट की धारा 21(5) में दी गई समय सीमा अनिवार्य नहीं होनी चाहिए और लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 का लाभ देते हुए मानवीय आधार पर देरी को माफ किया जाना चाहिए. हालांकि खंडपीठ ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. अदालत ने टिप्पणी की कि जब किसी विशेष कानून में अपील के लिए एक निश्चित और अधिकतम समय सीमा स्पष्ट रूप से तय कर दी जाती है, तो सामान्य कानूनों का हवाला देकर उसे अपनी मर्जी से बढ़ाया नहीं जा सकता.
90 दिन के बाद एक दिन की देरी भी स्वीकार्य नहीं
अदालत ने अपने आदेश में कड़ा रुख अपनाते हुए यह स्पष्ट किया है कि NIA एक्ट के तहत अपील दाखिल करने के लिए 90 दिन की समय सीमा अंतिम है. इस अवधि के बीत जाने के बाद एक दिन की भी देरी को माफ करना अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है. विशेष कानूनों के प्रावधानों को उसी रूप में लागू किया जाना अनिवार्य है जैसा कि संसद ने उन्हें अधिनियमित किया है. अमर यासार की याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने यह पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी.
समय सीमा का पालन अब और भी अनिवार्य
हाईकोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि NIA से जुड़े मामलों में अभियुक्तों या याचिकाकर्ताओं को समय सीमा का बेहद कड़ाई से पालन करना होगा. निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद कानूनी अपील का विकल्प हमेशा के लिए बंद हो सकता है, क्योंकि अदालत अब इसमें कोई लचीलापन नहीं दिखाएगी. इस फैसले का असर राज्य में चल रहे एनआईए के कई अन्य मामलों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है.