Seraikela News: सरायकेला-खरसावां जिले में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में आ रही कमी ने आम जनता की कमर तोड़ दी है. 15 मार्च 2026 तक देशभर में 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर पहुंच गई है, जो पिछले महीने के मुकाबले 60 रुपये अधिक है. अप्रैल 2025 से शुरू हुआ कीमतों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि माना जा रहा है, जिससे मध्यम और गरीब परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है.
बाजारों में बदली स्थिति, अब मांग में है लकड़ी का बोझ
गैस की महंगाई और किल्लत का सीधा असर अब ईंधन के पारंपरिक स्रोतों पर दिखने लगा है. जिले में सूखी लकड़ी की मांग में अचानक भारी तेजी आई है. दिलचस्प बात यह है कि जो ग्रामीण और आदिवासी महिलाएं पहले सिर पर लकड़ी का बोझ लेकर ग्राहकों की तलाश में भटकती थीं, उन्हें अब खरीदारों का इंतजार नहीं करना पड़ता. अब स्थिति यह है कि स्थानीय दुकानदार और होटल संचालक पहले से ही ऑर्डर देकर तय मात्रा में लकड़ी मंगवा रहे हैं.
चाय की दुकानों पर संकट, ईंधन की तलाश तेज
ऊर्जा की कीमतों में उछाल का असर छोटे व्यापारियों पर भी पड़ा है. सुबह के समय चाय की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ तो रहती है, लेकिन गैस की किल्लत और महंगी लकड़ी के कारण कई दुकानदार नियमित रूप से सेवा देने में असमर्थ नजर आ रहे हैं. कुछ ही दुकानदार ऐसे हैं जो ईंधन का प्रबंधन कर दुकान खोल पा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि ऊर्जा पर होने वाले खर्च में वृद्धि ने उनके दैनिक जीवन के साथ-साथ खान-पान की आदतों को भी प्रभावित किया है.
आदिवासी समुदायों के लिए रोजगार का नया जरिया
एक ओर जहां महंगाई ने लोगों को परेशान किया है, वहीं दूसरी ओर जंगल से सूखी लकड़ी चुनकर लाने वाले ग्रामीणों के लिए यह कमाई का एक अस्थायी जरिया बन गया है. पहले उनकी उपज को बहुत कम दाम मिलते थे या तवज्जो नहीं दी जाती थी, लेकिन अब लकड़ी की अच्छी कीमत मिल रही है. हालांकि, लंबे समय तक ईंधन के लिए लकड़ी पर निर्भरता पर्यावरण और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से चिंता का विषय बनी हुई है.