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  • 2026-03-15

Jharkhand Big News: झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था बदहाल, 13 महत्वपूर्ण बोर्ड-निगमों में अध्यक्ष के पद खाली

Jharkhand Big News: झारखंड में आम जनता की समस्याओं को सुनने और उनके अधिकारों की रक्षा करने वाले संस्थान वर्तमान में अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं. राज्य के कई महत्वपूर्ण आयोग और बोर्ड लंबे समय से अध्यक्ष विहीन हैं, जिससे सरकारी कामकाज की जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. अनाज न मिलने की शिकायत हो या मानवाधिकारों का हनन, पीड़ितों को सुनने वाला कोई शीर्ष अधिकारी मौजूद नहीं है.

खाद्य और मानवाधिकार आयोग में सुनवाई ठप
झारखंड राज्य खाद्य आयोग में पिछले डेढ़ साल से कोई अध्यक्ष नहीं है. इसका सीधा असर गरीबों की राशन व्यवस्था पर पड़ रहा है, क्योंकि अनाज न मिलने की शिकायतों पर सुनवाई करने वाला कोई उच्च पदाधिकारी नहीं है. इसी तरह, मानवाधिकार आयोग भी लंबे समय से बिना अध्यक्ष के चल रहा है, जिससे पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है और मामलों का अंबार लग गया है.

लोकायुक्त और सूचना आयोग के हजारों मामले लंबित
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाले लोकायुक्त का पद जून 2021 से खाली पड़ा है, जिसके कारण 3,000 से अधिक मामले फाइलों में दबे हुए हैं. वहीं, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जवाबदेही तय करने वाला राज्य सूचना आयोग मई 2020 से पूरी तरह निष्क्रिय है. मुख्य सूचना आयुक्त सहित सभी छह आयुक्तों के पद रिक्त होने से जनता को महत्वपूर्ण सूचनाएं मिलना लगभग बंद हो गया है और शासन में पारदर्शिता खत्म हो रही है.

प्रभार के भरोसे चल रहे हैं बड़े संस्थान
राज्य के कई महत्वपूर्ण संस्थान वर्तमान में स्थायी नेतृत्व के बजाय प्रभार के भरोसे चल रहे हैं. झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के प्रभारी अध्यक्ष आईएएस प्रशांत कुमार हैं, जबकि उपभोक्ता आयोग में कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में काम चलाया जा रहा है. इन पदों पर नियुक्तियों में हो रही देरी से न केवल युवाओं के रोजगार पर असर पड़ रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का निपटारा भी ठप है.

एक दर्जन से अधिक संस्थानों में नेतृत्व की कमी
झारखंड में एक दर्जन से अधिक प्रमुख संस्थान नेतृत्व की कमी से जूझ रहे हैं. इनमें पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग, राज्य महिला आयोग, राज्य बाल संरक्षण आयोग, वन विकास निगम, आरआरडीए (RRDA), टीवीएनएल (TVNL) और डॉ. राम दयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान जैसे महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं. इन रिक्तियों के कारण प्रशासनिक निर्णय लेने में देरी हो रही है और आम जनता को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है.
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