Jharkhand News: विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक कल्पना सोरेन ने विपक्ष के कटौती के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक अवसर पहुंचाने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना समेत कई की हुई प्रसंशा
कल्पना सोरेन ने कहा कि मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के लिए 1465 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि नारी शक्ति के सशक्तिकरण के लिए कुल 34 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचा रही है। सोरेन ने राशि को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये किए जाने को महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सहारा मिला है।
आगे कल्पना सोरेन ने कहा कि सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना किशोरियों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ बाल विवाह को रोकने और उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने का काम कर रही है। बजट का करीब 11 प्रतिशत हिस्सा बच्चों के विकास और उनके भविष्य को मजबूत करने के लिए रखा गया है।
विधायक ने मरांग गोमके पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के बारे में कहा कि इस योजना के तहत सरकार 100 से अधिक बच्चों के विदेश के विश्वविद्यालयों में पढ़ने, रहने और यात्रा का उठा रही है साथ ही उन्होंने राज्य में मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए शुरू किए गए कोचिंग केंद्रों का भी जिक्र किया।
पेंशन योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले 18 वर्षों में केवल 12 लाख लोग पेंशन योजना से जुड़े थे, जबकि वर्तमान सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में 34 लाख लोगों को सर्वजन पेंशन योजना से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सर्वजन पेंशन के लिए 3500 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।
कल्पना सोरेन ने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ भेदभाव का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पोस्ट मैट्रिक और प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति की राशि में केंद्र की ओर से भारी कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र से पर्याप्त सहयोग न मिलने के बावजूद राज्य सरकार अपने संसाधनों से बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है. इसी कारण राज्य ने अबुआ आवास और सीएम ईजीपी जैसी योजनाएं शुरू की हैं।
उन्होंने बजट में सरना मसना की घेराबंदी और पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे ढोल, नगाड़ा और मांदर की आपूर्ति के प्रावधान का भी स्वागत किया. उन्होंने कहा कि यह झारखंड की संस्कृति और परंपरा को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।