Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा की मंगलवार की कार्यवाही हंगामे और हाई-वोल्टेज ड्रामे की भेंट चढ़ गई. सदन की शुरुआत होते ही भाजपा विधायकों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर वेल में आकर जोरदार नारेबाजी की, जिससे कार्यवाही पूरी तरह बाधित हो गई. विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर जनहित के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया, जिसके बाद संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर के हस्तक्षेप और नियमों के तहत बात रखने की अपील पर विधायक अपनी सीटों पर लौटे.
कानून-व्यवस्था पर हमला: "अबुआ नहीं, यह बबुआ सरकार है"
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने सरकार के “अबुआ राज” के नारे पर कटाक्ष करते हुए इसे “बबुआ सरकार” करार दिया और कहा कि पाकुड़ और गिरिडीह की हालिया घटनाएं प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता प्रमाण हैं. मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य के अधिकारी अब पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं, इसलिए सदन के अन्य सभी कार्यों को स्थगित कर इस विषय पर विशेष चर्चा कराई जानी चाहिए. इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में विपक्ष ने यह मुद्दा नहीं उठाया था और सदन की प्रक्रिया नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी.
मंत्री और विधायक के बीच नोकझोंक, मार्शल आउट की नौबत
सदन की कार्यवाही के दौरान उस समय स्थिति और बिगड़ गई जब सत्ता पक्ष के मंत्री सुदिव्य सोनू और आजसू विधायक निर्मल महतो के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई. विवाद इतना बढ़ा कि विधानसभा अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्मल महतो को मार्शल आउट करने का आदेश दे दिया. इस फैसले पर बाबूलाल मरांडी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के सदस्यों को विपक्ष को उकसाने से बचना चाहिए, विशेषकर नए विधायकों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए. बाद में माहौल को शांत करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री के ही आग्रह पर अध्यक्ष ने पक्ष और विपक्ष के एक-एक सदस्य को भेजकर विधायक को वापस सदन में बुलाया.
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: अल्पसंख्यक स्कूलों में संसाधनों की कमी का मुद्दा
माले विधायक अरूप चटर्जी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर करते हुए अल्पसंख्यक विद्यालयों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने सदन को बताया कि इन स्कूलों में कक्षा 1 से 6 तक के बच्चों को अभी तक ड्रेस और पाठ्य सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे छात्रों की पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं. इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए लापरवाही का आरोप लगाया, जिस पर सरकार ने आश्वासन दिया कि वह प्रक्रिया के तहत हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है.