Delhi: पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और युद्ध की आहट के बीच भारत सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। राज्यसभा में विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत इस क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों पर अत्यंत गंभीर है और सभी पक्षों से शांति की अपील करता है।
संवाद और कूटनीति पर जोर
विदेश मंत्री ने सदन को बताया कि भारत ने 20 फरवरी को ही आधिकारिक बयान जारी कर अपनी चिंताएं साझा कर दी थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। जयशंकर ने कहा, "मौजूदा संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। भारत ने हमेशा से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन का समर्थन किया है।
भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा संकट
विपक्ष द्वारा पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों की सुरक्षा और देश पर पड़ने वाले ऊर्जा संकट के प्रभाव पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा सरकार वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। दूतावास लगातार संपर्क में हैं और आवश्यकता पड़ने पर भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव योजना तैयार की जा रही है। ऊर्ज क्षेत्र में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति पर पड़ने वाले असर की सरकार निरंतर निगरानी कर रही है ताकि देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो।