Jharkhand News: हजारीबाग लैंड स्कैम के गंभीर आरोपों में घिरे आईएएस अधिकारी विनय चौबे ने एक बार फिर कानूनी राहत के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं. करीब 10 महीनों से जेल की सलाखों के पीछे बंद चौबे ने झारखंड हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है. जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में इस मामले पर सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को इस याचिका पर अपना आधिकारिक जवाब पेश करने का आदेश दिया है.
73 लोगों के खिलाफ चार्जशीट और घोटाले का सिंडिकेट
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इस मामले में अपनी जांच पूरी करते हुए चार्जशीट दाखिल कर चुका है. एसीबी ने शुरुआती पड़ताल के बाद रांची में कांड संख्या 11/2025 दर्ज किया था. इस बड़े घोटाले में विनय चौबे के अलावा उनके करीबी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन सीओ शैलेश कुमार और बिचौलिए विजय सिंह समेत कुल 73 लोगों को आरोपी बनाया गया है. जांच एजेंसी का दावा है कि उनके पास विनय चौबे की संलिप्तता के पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद हैं.
पद का दुरुपयोग कर जमीन के म्यूटेशन का खेल
एसीबी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिस भूमि को लेकर यह पूरी कानूनी कार्रवाई हो रही है, वह विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के नाम पर दर्ज है. आरोप है कि इस जमीन को अवैध तरीके से दिलाने और उसका सरकारी म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) करवाने में तत्कालीन उपायुक्त विनय चौबे और अंचल अधिकारियों ने बिचौलियों के साथ मिलकर पद का जमकर दुरुपयोग किया. गवाहों के बयानों ने भी इस घोटाले में बड़े अधिकारियों और ब्रोकरों के बीच के गठजोड़ की पुष्टि की है.
हजारीबाग सदर अंचल की वन भूमि पर अवैध कब्जा
विवादित जमीन हजारीबाग के सदर अंचल स्थित बभनवे मौजा (थाना नंबर 252) की बताई जा रही है. जांच में सामने आया कि खाता नंबर 95 और 73 के तहत आने वाले विभिन्न प्लॉटों का कुल रकबा लगभग एक एकड़ है, जिस पर विनय सिंह और उनकी पत्नी का कब्जा है. वन भूमि होने के बावजूद इस कीमती जमीन की हेराफेरी में प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखा गया. अब हाईकोर्ट में एसीबी के जवाब के बाद ही यह तय होगा कि आईएएस विनय चौबे को जमानत मिलेगी या उन्हें फिलहाल जेल में ही रहना होगा.