BIG BREAKING: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमले “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” ने वैश्विक विमानन सेवाओं की कमर तोड़ दी है. खाड़ी क्षेत्र के युद्ध के मैदान में तब्दील होने के बाद ईरान, इजरायल, इराक, यूएई और जॉर्डन जैसे देशों ने अपने हवाई क्षेत्र को पूरी तरह बंद कर दिया है. इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारत के प्रमुख हवाई अड्डों पर दिखाई दे रहा है, जहां शनिवार से ही करीब 444 से अधिक उड़ानें रद्द होने की सूचना है. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों के एयरपोर्ट्स पर हजारों यात्री फंसे हुए हैं, जिन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है.
देश के प्रमुख हवाई अड्डों की स्थिति और यात्रियों की मुश्किलें
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सऊदी अरब और खाड़ी देशों की ओर जाने वाले यात्री पिछले 14-15 घंटों से फंसे हुए हैं. मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी अमेरिका और यूरोप जाने वाले यात्रियों ने बिना पूर्व सूचना के फ्लाइट्स रद्द होने पर भारी हंगामा किया. इसी तरह बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा एयरपोर्ट पर इटली और अबू धाबी जाने वाले यात्रियों को अंतिम समय पर यात्रा टालने को कहा गया. कोलकाता और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में भी विदेशी नागरिकों के फंसने की खबरें हैं, क्योंकि दोहा और दुबई जैसे बड़े एविएशन हब पर संचालन ठप होने से वैश्विक स्तर पर 1,000 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुई हैं.
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरलाइंस की सतर्कता
बढ़ते संकट को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सभी एयरलाइनों के साथ समन्वय तेज कर दिया है. बेंगलुरु और दिल्ली जैसे हवाई अड्डों पर यात्रियों की सहायता के लिए विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं. एयरलाइन स्टाफ का कहना है कि जब तक संघर्षविराम या स्थिति सामान्य नहीं होती, उड़ानों का संचालन अनिश्चित बना रहेगा. प्रशासन ने यात्रियों को सख्त हिदायत दी है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस ऑनलाइन जरूर चेक करें या संबंधित एयरलाइन से संपर्क करें. इस संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई वीआईपी और जनप्रतिनिधि भी दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं.