भक्तिमय वातावरण और प्रेरणादायक मंचन
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। शिविर के दौरान शिक्षिकाओं ने मित्रता विषय पर एक प्रेरणादायक लघु नाटिका प्रस्तुत की, जिसने बच्चों को आपसी सहयोग और सद्भाव की सीख दी। इसके बाद नन्हे विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से गीता पंचामृत और हनुमान चालीसा का पाठ कर अपनी श्रद्धा और अनुशासन का परिचय दिया। बोलो राम राम राम और छोटी-छोटी गैया जैसे भजनों से पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया।
रचनात्मकता और प्रकृति प्रेम का संगम
शिविर में अभिभावकों और बच्चों की सक्रिय सहभागिता के लिए दो विशेष गतिविधियाँ आयोजित की गईं अभिभावकों ने देवी-देवताओं के वाहनों के चित्र बनाए, जिनमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक रंग भरे। इससे अभिभावक-बाल संबंधों को एक नई मजबूती मिली।बच्चों ने अपने अभिभावकों के साथ मिलकर बर्ड फीडर बनाए और उन्हें वृक्षों की शाखाओं पर बाँधा। इस गतिविधि के माध्यम से नन्हे बच्चों को प्रकृति और मूक पक्षियों के प्रति संवेदनशील रहने का पाठ पढ़ाया गया।
सर्वांगीण विकास की आधारशिला
प्राचार्या मीना विल्खू ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के शिविर बच्चों के सर्वांगीण विकास की नींव होते हैं। उन्होंने जोर दिया कि शिशु अवस्था में बोए गए संस्कार ही भविष्य में उन्हें एक सशक्त और संवेदनशील नागरिक बनाएंगे। कार्यक्रम का समापन भव्य आरती, प्रसाद वितरण और शांति पाठ के साथ हुआ। इस आयोजन ने बच्चों में आध्यात्मिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों के प्रति एक नई चेतना जगाई।