Municipal Elections: चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है, वहीं आज शनिवार शाम पांच बजे के बाद माहौल अचानक शांत हो जाएगा। बता दें कि चुनाव प्रचार का आज अंतिम दिन है। निर्वाचन नियमों के मुताबिक, शाम पांच बजे के बाद लाउडस्पीकर से प्रचार, जनसभाएं और जुलूस पूरी तरह बंद हो जाएंगे।
हालांकि, उम्मीदवारों को डोर-टू-डोर संपर्क अभियान की अनुमति रहेगी। वे बिना किसी रैली या सार्वजनिक कार्यक्रम के घर-घर जाकर मतदाताओं से सीधे संवाद कर सकेंगे और अपने पक्ष में समर्थन मांगेंगे।
दिनभर रैलियां और पद यात्राएं
अंतिम दिन होने के कारण सभी प्रत्याशी पूरी ताकत के साथ मैदान में डटे हुए हैं। सुबह से ही रैलियों, नुक्कड़ सभाओं और पद यात्राओं का दौर जारी है। उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ अधिक से अधिक क्षेत्रों में पहुंचकर मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी सक्रिय नजर आ रहे हैं। हर गली-मोहल्ले में चुनावी माहौल दिखाई दे रहा है, क्योंकि शाम होते ही सार्वजनिक प्रचार पर विराम लग जाएगा।
अब शुरू होगा "चुप प्रचार"
शाम पांच बजे के बाद भले ही सार्वजनिक कार्यक्रम बंद हो जाएंगे, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह थमने वाली नहीं हैं। इसके बाद "चुप प्रचार" का दौर शुरू होगा।
इस दौरान उम्मीदवार सीमित दायरे में बैठकों के जरिए रणनीति बनाएंगे। फोन कॉल और निजी संपर्क के माध्यम से समर्थकों और प्रभावशाली लोगों से संवाद किया जाएगा। विपक्षी खेमे के नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिशें भी तेज हो सकती हैं।
23 फरवरी के मतदान की तैयारी तेज
प्रचार थमने के बाद अब पूरा फोकस 23 फरवरी को होने वाले मतदान पर रहेगा। उम्मीदवार और उनके समर्थक बूथ प्रबंधन, मतदाताओं की सूची और मतदान दिवस की रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट जाएंगे।
आज का दिन चुनावी मैदान में निर्णायक माना जा रहा है। शाम पांच बजे के बाद भले ही लाउडस्पीकर शांत हो जाएं, लेकिन सियासी हलचल पर्दे के पीछे जारी रहेगा।