Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने अधिवक्ता महेश तिवारी के खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही को समाप्त कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच जजों की विशेष पीठ ने वकील द्वारा मांगी गई बिना शर्त माफी को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया. अदालत ने भविष्य में इस तरह के आचरण की पुनरावृत्ति न करने की चेतावनी देते हुए मामले को ड्रॉप कर दिया है.
कोर्ट रूम में हुई थी तीखी नोकझोंक
यह पूरा विवाद अक्टूबर 2025 का है, जब जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी और न्यायाधीश के बीच बहस हो गई थी. इस दौरान वकील ने “डोंट क्रॉस द लिमिट” (हद पार न करें) जैसे शब्दों का प्रयोग किया था. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हाईकोर्ट ने इसका स्वतः संज्ञान लिया और अधिवक्ता के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज किया था.
सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई थी नाराजगी
अवमानना नोटिस के खिलाफ महेश तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने वकील के व्यवहार पर सख्त टिप्पणी करते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था. हालांकि, शीर्ष अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट में बिना शर्त माफी मांगने की सलाह दी थी और हाईकोर्ट से इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध किया था.
हलफनामा दायर कर जताया खेद
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद अधिवक्ता ने हाईकोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष हलफनामा दाखिल किया. इसमें उन्होंने अपने व्यवहार के लिए गहरा खेद व्यक्त करते हुए बिना शर्त माफी मांगी और भविष्य में न्यायालय की गरिमा बनाए रखने का आश्वासन दिया. हाईकोर्ट ने अधिवक्ता के पश्चाताप को स्वीकार करते हुए विवाद को पूरी तरह समाप्त करने का आदेश जारी किया.