Jamshedpur: इडमाइटिंग में आयोजित कोल्हान प्रमंडल की महत्वपूर्ण बैठक में एटक के नेताओं ने 12 फरवरी 2026 को हुई देशव्यापी आम हड़ताल की सफलता का जश्न मनाया और आगामी संघर्ष की रणनीति तैयार की। बैठक की अध्यक्षता कॉमरेड ओम प्रकाश सिंह ने की, जबकि कोल्हान के महासचिव कॉमरेड अंबुज ठाकुर ने कार्य रिपोर्ट प्रस्तुत की।
हड़ताल की धमक, बैंकों से लेकर चक्का जाम तक
महासचिव अंबुज ठाकुर ने बताया कि कोल्हान प्रमंडल में हड़ताल पूर्णत, सफल रही। एटक से संबद्ध यूनियनों ने सीटू के साथ मिलकर इस आंदोलन को ऐतिहासिक बनाया। हालांकि, उन्होंने टाटा जैसी बड़ी कंपनियों और इंडस्ट्रियल एरिया की कुछ यूनियनों की निष्क्रियता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे जमीन पर कहीं नजर नहीं आए।
बैठक में हड़ताल के प्रमुख घटनाक्रमों को साझा किया गया
चाकुलिया कॉमरेड सरकार किसकी के नेतृत्व में NH-33 को घंटों जाम रखा गया। घाटशिला HCL के कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर श्रम कानूनों का विरोध किया और प्रदर्शन किया। कॉमरेड विक्रम कुमार की अगुआई में कामगारों ने काम ठप रखा। ऑल इंडिया PNB बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन के स्टेट सेक्रेटरी ने बताया कि SBI को छोड़कर कोल्हान की सभी सरकारी बैंक शाखाएं बंद रहीं। बिस्तुपुर स्थित SBI मुख्य शाखा के गेट को भी जाम किया गया।
मजदूरों के शोषण का हथियार हैं चार श्रम संहिता
अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा लाई गई चार श्रम संहिताओं पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि कैसे ये नियम मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों को छीनकर उनके शोषण का रास्ता खोलते हैं। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक इन कानूनों को वापस नहीं लिया जाता, संघर्ष जारी रहेगा।
संगठनात्मक निर्णय और आगामी कार्यक्रम
समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय लिए गए रिटर्न और लेवी सभी संबद्ध यूनियनों को वर्ष 2025 का वार्षिक रिटर्न भरने और मार्च के पहले सप्ताह तक सदस्यता नवीकरण व लेवी जमा करने का निर्देश दिया गया। केदार दास स्मृति दिवस आगामी 19 फरवरी को कॉमरेड केदार दास की पुण्यतिथि को श्रद्धापूर्वक मनाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में शामिल प्रमुख यूनियन
इस बैठक में सीमेंट कामगार यूनियन, टाटा पावर, टाटा ब्लू स्कोप, जमशेदपुर मजदूर यूनियन, NMDC माइंस किरीबुरू-मेघहातु बुरु, यूनाइटेड मिनरल वर्कर्स मनोहरपुर और खेत मजदूर यूनियन बहरागोड़ा के पदाधिकारी शामिल थे। विचार रखने वाले प्रमुख नेताओं में कॉमरेड आर. एस. राय, लाडो जोंको, सत्येंद्र सिंह, एन. एम. पॉल, दिलीप झा, मो. नई आलम और महेश बेसरा शामिल रहे।