Dhanbad News: धनबाद नगर निकाय चुनाव में गठबंधन की राजनीति हाशिए पर नजर आ रही है. इंडिया गठबंधन के दो प्रमुख घटक दल, कांग्रेस और झामुमो, मेयर पद के प्रत्याशी को लेकर आमने-सामने आ गए हैं. चुनावी प्रचार के दौरान दोनों दलों के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी ने गठबंधन के भीतर दरार को स्पष्ट कर दिया है.
कांग्रेस जिलाध्यक्ष के बयान से भड़का विवाद
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस के धनबाद जिला अध्यक्ष संतोष सिंह ने मेयर पद के कांग्रेस प्रत्याशी शमशेर आलम के चुनावी कार्यालय के उद्घाटन के दौरान झामुमो समर्थित प्रत्याशी चंद्रशेखर अग्रवाल पर व्यक्तिगत टिप्पणी की. संतोष सिंह ने अग्रवाल को “भटकती आत्मा” बताते हुए कहा कि केवल मुक्तिधाम बनाने से विकास नहीं होता. उन्होंने पूर्व के कार्यों पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल में हुई जांचों का भी उल्लेख किया.
झामुमो का पलटवार और गठबंधन धर्म की दुहाई
झामुमो जिला कमेटी ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें मर्यादा में रहने की सलाह दी है. झामुमो जिला सचिव मन्नू आलम ने संतोष सिंह की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में उनके अपने बूथ पर कांग्रेस को बहुत कम वोट मिले थे. झामुमो ने आरोप लगाया कि संतोष सिंह परोक्ष रूप से भाजपा की मदद कर रहे हैं. साथ ही, मन्नू आलम ने चंद्रशेखर अग्रवाल के कार्यकाल में हुए आठ लेन सड़क, फ्लाईओवर और पार्क जैसे विकास कार्यों को गिनाते हुए मामले को गठबंधन की उच्च स्तरीय बैठक में ले जाने की बात कही.
गठबंधन के भीतर स्थानीय हितों का टकराव
धनबाद की यह राजनीतिक तकरार दर्शाती है कि राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट होने वाले दल स्थानीय निकाय चुनावों में अपने व्यक्तिगत आधार और वर्चस्व के लिए सिद्धांतों से समझौता करने को तैयार रहते हैं. मेयर जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए आपसी खींचतान न केवल गठबंधन की छवि को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि विपक्षी दलों को लाभ मिलने की संभावना भी बढ़ा देती है. यह विवाद स्पष्ट करता है कि स्थानीय मुद्दों और पद के मोह के सामने “गठबंधन धर्म” का पालन करना क्षेत्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती है.